वाराणसी को मिलेगा राष्ट्रीय फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी का तोहफा, योगी कैबिनेट ने दी 50 एकड़ भूमि को मंजूरी
वाराणसी में राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) का ऑफ-कैंपस खुलेगा। योगी कैबिनेट ने राजातालाब तहसील के शहंशाहपुर में 50 एकड़ भूमि निश्शुल्क देने को मंजूरी दी। इससे फोरेंसिक, साइबर क्राइम और आपराधिक जांच की पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा।
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को एक और बड़ी शैक्षिक सौगात मिलने जा रही है। गुजरात स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) का ऑफ-कैंपस अब काशी में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसके लिए 50 एकड़ भूमि निश्शुल्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
यह विश्वविद्यालय वाराणसी की राजातालाब तहसील के शहंशाहपुर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। भूमि पशुधन विभाग से 99 वर्षों की लीज पर दी जाएगी। शासन-प्रशासन की तैयारी है कि इसी शैक्षिक सत्र से किसी वैकल्पिक भवन में शिक्षण कार्य शुरू कर दिया जाए, जबकि स्थायी परिसर के निर्माण की प्रक्रिया जल्द आरंभ होगी।
एनएफएसयू के इस ऑफ-कैंपस से फॉरेंसिक साइंस, साइबर क्राइम, डिजिटल फॉरेंसिक और आपराधिक जांच के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को बड़ी शैक्षिक और तकनीकी मजबूती मिलेगी। यहां लगभग 70 डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के माध्यम से करीब 2,500 छात्रों को शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही वाराणसी की यह पांचवीं यूनिवर्सिटी होगी।
जिला प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय के खुलने से न केवल युवाओं को अपराधों की वैज्ञानिक जांच से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी। रामनगर में पहले से संचालित फोरेंसिक लैब और बीएचयू में चल रहे संबंधित कोर्स इस दिशा में पहले से मौजूद आधार हैं।
2008 में हुई थी स्थापना
राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में गुजरात के गांधीनगर में की गई थी। वर्ष 2020 में भारत सरकार ने इसे संसद के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्व का विश्वविद्यालय घोषित किया। वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों में इसके 12 परिसर और दो अकादमियां संचालित हो रही हैं, जिनमें दिल्ली, गोवा, भोपाल सहित कई शहर शामिल हैं।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि भूमि चिन्हित कर ली गई है और शासन से अनुमति मिलने के साथ ही योजना को धरातल पर उतारा जाएगा। यह पहल काशी के शैक्षिक और तकनीकी विकास में एक अहम कदम साबित होगी।
