Movie prime

खुले आसमान के नीचे प्रसव, नवजात की मौत... अब ANM सस्पेंड, CMO ऑफिस में धरने पर बैठी

वाराणसी के विरांवकोट सीएचसी में खुले आसमान के नीचे प्रसव और नवजात की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एएनएम मुक्ता तिवारी को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई के विरोध में एएनएम सीएमओ कार्यालय में धरने पर बैठ गई हैं।
 
वाराणसी
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: बड़ागांव क्षेत्र के विरांव कोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अस्पताल परिसर के खुले आसमान के नीचे एक वनवासी महिला का प्रसव कराए जाने और बाद में नवजात की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मुकेश कुमार की ओर से कराई गई जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ) मुक्ता तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई से नाराज एएनएम ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर धरना शुरू कर दिया है।

खुले में हुआ प्रसव, पांच दिन बाद नवजात की मौत

मामला विकास खंड बड़ागांव के विरांव कोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। सियरहा वनवासी बस्ती की 38 वर्षीय सविता को प्रसव पीड़ा होने पर उनके परिजन दोपहर करीब दो बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। सविता हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में थीं और यह उनका नौवां प्रसव था।

आरोप है कि उन्हें लेबर रूम में भर्ती कर सुरक्षित प्रसव कराने के बजाय शाम करीब चार बजे अस्पताल परिसर में खुले स्थान पर प्रसव कराया गया। प्रसव के पांच दिन बाद नवजात की मौत हो गई। इतना ही नहीं, जच्चा और बच्चा को बिना पर्याप्त देखभाल और आवश्यक प्राइवेसी के उसी दिन रात करीब आठ बजे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार सामान्य स्थिति में भी प्रसव के बाद 24 से 48 घंटे तक निगरानी आवश्यक होती है।

खबर के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने अपर निदेशक स्तर से जांच कराने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने नोडल अधिकारी डॉ. निकुंज वर्मा को मामले की विस्तृत जांच सौंपी। दो दिन तक अस्पताल और संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर ANM निलंबित

जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर एएनएम मुक्ता तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आराजीलाइन से संबद्ध किया गया है।

इसके अलावा पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के लिए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एस. कन्नौजिया को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

निलंबन के विरोध में CMO कार्यालय में धरने पर बैठीं ANM

निलंबन आदेश मिलने के बाद एएनएम मुक्ता तिवारी सीएमओ कार्यालय पहुंचीं और कार्रवाई का विरोध करते हुए धरने पर बैठ गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वीडियो देखे और बिना ठोस साक्ष्यों के केवल आशंका के आधार पर उन्हें दोषी ठहरा दिया गया। मुक्ता तिवारी ने कहा कि उनका 13 वर्षों का सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट रहा है और पूरे ब्लॉक में सबसे अधिक प्रसव उन्होंने ही कराए हैं। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।

अपर निदेशक बोले- जरूरत पड़ी तो होगी दोबारा जांच

अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. एन.डी. शर्मा ने कहा कि फिलहाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से एएनएम के निलंबन संबंधी पत्र प्राप्त हुआ है, जबकि विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी या अनियमितता पाई जाती है तो दोबारा जांच कराई जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जांच जारी, आगे भी हो सकती है कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जा रहा है।