Movie prime

वाराणसी: बारात घर की जमीन पर बिजली घर बनाने का विरोध, ग्रामीणों का अल्टीमेटम- निर्माण हुआ तो होगा आंदोलन 

वाराणसी के सलारपुर में बारात घर के लिए चिन्हित जमीन पर बिजली घर बनाने के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने विरोध किया है। लोगों ने इसे सुरक्षा के लिए खतरनाक बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है और प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।

 
वाराणसी के सलारपुर
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: सलारपुर क्षेत्र (वार्ड नंबर 5) में एक जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह जमीन पहले बारात घर (सामुदायिक भवन) के निर्माण के लिए चिन्हित की गई थी, लेकिन अब उसी स्थान पर बिजली घर (सबस्टेशन) बनाए जाने की योजना से स्थानीय लोग नाराज हैं।

ग्रामीणों का आरोप- जनता को किया जा रहा गुमराह

स्थानीय निवासियों ने पार्षद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले को लेकर जनता को सही जानकारी नहीं दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले उन्हें बारात घर का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब अचानक योजना बदल दी गई है।

पुराने फैसले का हवाला, बाउंड्री भी बन चुकी

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2000 में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा इस जमीन को गरीब परिवारों के लिए बारात घर बनाने हेतु आवंटित किया गया था। इतना ही नहीं, इस जमीन की बाउंड्री वॉल भी पहले ही बन चुकी है, जिससे लोगों को उम्मीद थी कि यहां जल्द ही सामुदायिक भवन तैयार होगा।

सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल

बिजली घर के प्रस्ताव को लेकर लोगों ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जताई हैं। घनी आबादी के बीच सबस्टेशन बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी तकनीकी खराबी या हादसे की स्थिति में पूरी बस्ती खतरे में पड़ सकती है। उनका यह भी कहना है कि नियमों के अनुसार ऐसे प्रोजेक्ट आबादी से दूर होने चाहिए।

गरीब परिवारों के लिए जरूरी है बारात घर

स्थानीय लोगों ने बताया कि बारात घर मलीन बस्ती के परिवारों के लिए बेहद जरूरी सुविधा है। यहां कम खर्च में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। ऐसे में इस जमीन का उपयोग बदलना गरीबों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन से पुनर्विचार की मांग

ग्रामीणों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा कर निर्माण शुरू किया गया, तो वे सलारपुर पोखरे पर धरना और अनशन करेंगे। साथ ही उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और बस्ती के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।