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रामनगर में काशिराज की जमीन पर कब्जा लेने पहुंची पुलिस, कृष्ण प्रिया ने किया विरोध

वाराणसी के रामनगर में काशिराज परिवार की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया। पुलिस यार्ड के लिए अनुबंधित भूमि पर बुलडोजर चलने पर कृष्ण प्रिया ने आपत्ति जताई, जिसके बाद प्रशासन ने काम रुकवा दिया।

 
काशिराज की जमीन
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वाराणसी: रामनगर नगर क्षेत्र में काशिराज परिवार की जमीन को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया है। इस बार मामला रामनगर पुलिस और काशिराज परिवार की सदस्य कृष्ण प्रिया के बीच सामने आया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

जानकारी के अनुसार, रामनगर पुलिस को जब्त वाहनों को खड़ा करने के लिए एक यार्ड की आवश्यकता थी। इसके लिए पुलिस ने काशिराज परिवार के सदस्य अनंत नारायण सिंह से जमीन मांगी थी। अनंत नारायण सिंह ने दुर्गा मंदिर के समीप स्थित करीब एक बीघा भूमि 11 माह के अनुबंध पर एक हजार रुपये मासिक किराये पर पुलिस को दी थी।

शुक्रवार दोपहर पुलिस द्वारा किले के कर्मचारियों की मदद से उक्त जमीन पर बुलडोजर लगाकर साफ-सफाई का कार्य शुरू कराया गया। इसी दौरान पूर्व काशी नरेश स्वर्गीय विभूति नारायण सिंह की पुत्री कृष्ण प्रिया मौके पर पहुंचीं और जमीन को अपने हिस्से की बताते हुए आपत्ति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के कर्मचारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

स्थिति बिगड़ती देख रामनगर पुलिस ने तत्काल बुलडोजर से चल रहा कार्य रुकवा दिया। किले के मुख्तार-ए-आम अनिल सिंह ने बताया कि विवादित भूमि सुमेर मंदिर ट्रस्ट के नाम दर्ज लगभग 40 बीघा क्षेत्र का हिस्सा है, जिसके स्वामी अनंत नारायण सिंह हैं। 

उन्होंने कहा कि कृष्ण प्रिया द्वारा इस जमीन को लेकर न तो कोई मुकदमा दर्ज कराया गया है और न ही किसी न्यायालय में कोई वाद लंबित है। उन्होंने शनिवार को कृष्ण प्रिया के खिलाफ हस्तक्षेप को लेकर तहरीर देने की बात कही।

वहीं कृष्ण प्रिया का दावा है कि उक्त भूमि पर न्यायालय द्वारा 11 नवंबर 2025 से स्थगन आदेश पारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनंत नारायण सिंह और पुलिस की मिलीभगत से उनकी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। कृष्ण प्रिया ने कहा कि वह शनिवार को पुलिस कमिश्नर से मिलकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग करेंगी।

इस संबंध में रामनगर प्रभारी निरीक्षक दुर्गा सिंह ने बताया कि मुकदमे से संबंधित वाहनों को खड़ा करने के लिए यार्ड की आवश्यकता थी, इसी कारण अनुबंध किया गया। मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देश पर की जाएगी।