वाराणसी के रामनगर LBS अस्पताल में बनेगी 20 बेड की आधुनिक बर्न यूनिट, 1.93 करोड़ की मंजूरी
वाराणसी के रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय में 20 बेड की आधुनिक बर्न यूनिट बनाने को 1.93 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। NHM के तहत बनने वाली यह जिले की तीसरी बर्न यूनिट होगी, जिससे गंगा पार क्षेत्र के मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा मिलेगी।
वाराणसी: गंगा पार क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बड़ी राहत की खबर है। रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय में 20 बेड की अत्याधुनिक बर्न यूनिट का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत जनपद की तीसरी बर्न यूनिट के लिए शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है।
निर्माण कार्य पर लगभग 1.93 करोड़ रुपये (जीएसटी सहित) खर्च किए जाएंगे। कार्यदायी संस्था के रूप में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की ग्लोबल कंस्ट्रक्शन एंड कंसलटेंसी सेल को नामित किया गया है।
237 लाख की प्रारंभिक स्वीकृति, अंतिम लागत तय
NHM उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक के निर्देश पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक ने स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। पहले भारत सरकार से 237 लाख रुपये की अनंतिम स्वीकृति मिली थी, जिसमें- 193.26 लाख रुपये निर्माण कार्य के लिए, 43.74 लाख रुपये उपकरणों के लिए है।
पीएफएडी (प्रोजेक्ट फाइनेंशियल एप्रूवल डिवीजन) द्वारा परीक्षण के बाद निर्माण की अंतिम लागत 193.13 लाख रुपये तय की गई है। अस्पताल परिसर में ओटी और पावर स्टेशन के सामने दक्षिण दिशा की ओर स्थान चिह्नित किया गया है। आवास विकास परिषद डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने में जुट गया है।
जिले का तीसरा बर्न उपचार केंद्र
वाराणसी में वर्तमान में सरकारी स्तर पर बर्न ट्रीटमेंट की सुविधा बेहद सीमित है। जिले में 38 पीएचसी, 14 सीएचसी और पांच जिलास्तरीय अस्पताल हैं, लेकिन बर्न वार्ड केवल- मंडलीय अस्पताल, कबीरचौरा (27 बेड), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (7 बेड) में ही उपलब्ध हैं।
करीब 48 लाख की आबादी वाले जिले में आग लगने, सिलेंडर फटने और शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं में झुलसने के मामले अक्सर सामने आते हैं। सीमित बेड और प्लास्टिक सर्जन की कमी के कारण गंभीर मरीजों को लखनऊ या दिल्ली रेफर करना पड़ता है।
अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी उपलब्ध
नई बर्न यूनिट में वेंटिलेटर, मॉनिटर, बर्न ड्रेसिंग किट, आइसोलेशन सुविधा, स्किन ग्राफ्टिंग और इंटेंसिव केयर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं होंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बर्न मरीजों का इलाज अत्यधिक विशेषज्ञता मांगता है क्योंकि संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। वर्तमान में मंडलीय अस्पताल में सर्जन ही बर्न केस संभाल रहे हैं, जबकि प्लास्टिक सर्जन की आवश्यकता बनी हुई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जीसी द्विवेदी के अनुसार, अगले एक से डेढ़ वर्ष में यूनिट चालू होने की उम्मीद है।
