रामनगर रामलीला की शुरुआत से पहले हुआ द्वितीय गणेश पूजन, 25 सितंबर से 40 मंचों पर सजेगी रामकथा
वाराणसी की रामनगर रामलीला 25 सितंबर से शुरू होगी। 229 साल पुरानी इस परंपरा से पहले द्वितीय गणेश पूजन कराया गया। करीब दो घंटे चले अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार, संकल्प और रामचरितमानस के बालकांड का पाठ हुआ। 40 खुले मंचों पर करीब 30 दिनों तक रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का मंचन होगा।
वाराणसी: रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी से रामलीला विधिवत शुरू होगी। इससे पहले मंगलवार को धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में द्वितीय श्री गणेश पूजन कराया गया। करीब दो घंटे चले पूजन, संकल्प और रामचरितमानस के पाठ के दौरान रामनगर का माहौल भक्तिमय रहा।
गणेश वंदना के साथ शुरू हुए अनुष्ठान में रामायणी दल ने नारद वाणी में मानस की चौपाइयों का भावपूर्ण गायन किया। श्रद्धालु भी इस दौरान भक्ति में डूबे नजर आए।
गणेश वंदना से शुरू हुआ पूजन
द्वितीय गणेश पूजन की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना के साथ हुई। रामायणी दल ने नारद वाणी में विनयपत्रिका की पंक्ति 'गाइए गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन' का भावपूर्ण गायन किया। इसके बाद मंगलाचरण की प्रस्तुति हुई।
अनुष्ठान के दौरान 'मागत तुलसीदास कर जोरे। बसहु राम-सिय मानस मोरे॥' का पाठ भी किया गया। इसके माध्यम से प्रभु श्रीराम और माता सीता के हृदय में वास की कामना की गई।
राजा, प्रजा और श्रद्धालुओं के कल्याण का लिया संकल्प
रामनगर रामलीला की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार रामलीला अधिकारी पाठक जी ने जजमान के रूप में पंडित रामनारायण पांडेय से संकल्प पूजन कराया। इसमें रामलीला के निर्विघ्न और सफल आयोजन के साथ राजा, प्रजा, लीला देखने और सुनने वाले श्रद्धालुओं तथा आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं के कल्याण की कामना की गई।
पंडित रामनारायण पांडेय और शांत नारायण पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। अनुष्ठान में रामलीला के पंच स्वरूप श्रीराम, सीता, भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण के अलावा वशिष्ठ, दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल और अन्य सहायक पात्र शामिल रहे।
बालकांड के सात दोहे तक हुआ मानस पाठ
पूजन के बाद रामचरितमानस के बालकांड में मंगलाचरण से लेकर सात दोहे तक का नारद वाणी में पाठ किया गया। मानस की चौपाइयों और पदों का गायन सुनकर लीला प्रेमी श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से रामकथा में निहित मर्यादा, संस्कार, श्रद्धा और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश भी दिया गया।
229 साल पुरानी है रामनगर की रामलीला
रामनगर की रामलीला करीब 229 साल पुरानी परंपरा है। अपनी अनूठी प्रस्तुति और सांस्कृतिक विरासत के कारण इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भी स्थान मिला है।
करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्र में 40 खुले मंचों पर रामचरितमानस के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन किया जाता है। इसी वजह से रामनगर की रामलीला को दुनिया की सबसे बड़ी और अनूठी रामलीलाओं में शामिल किया जाता है।
करीब 30 दिनों तक चलने वाली रामलीला में देश-विदेश से पांच लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इन दिनों रोजाना रात करीब 10 बजे तक अलग-अलग लीला स्थलों पर 10 से 20 हजार दर्शकों की मौजूदगी रहती है। वहीं, प्रमुख प्रसंगों वाले दिनों में दर्शकों की संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है।
