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सड़क हादसे में घायल हुए तो 112 पर करें कॉल, वाराणसी में ऐसे मिलेगा 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज

वाराणसी में सड़क हादसे में घायल लोगों को डायल 112 पर सूचना देने के बाद 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिल सकेगा। पुलिस ई-डीएआर पोर्टल पर दुर्घटना दर्ज कर पेशेंट आईडी बनाएगी। वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ई-डीएआर प्रक्रिया में प्रदेश में पहले स्थान पर है और अब तक 21 घायलों को लाभ मिला है।
 
प्रधानमंत्री राहत योजना
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वाराणसी: सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज के लिए पैसे की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हादसा होते ही डायल 112 पर सूचना देने पर पुलिस मौके पर पहुंचकर घायल की पेशेंट आईडी बनाएगी और उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करेगी। इसके बाद प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकेगा। यह सुविधा देश में किसी भी सड़क पर हुए हादसे में घायल लोगों के लिए लागू है।

वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में ई-डीएआर (इलेक्ट्रानिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट) पोर्टल पर हादसे का विवरण दर्ज करने और घायल की पेशेंट आईडी जेनरेट करने में प्रदेश में पहले स्थान पर है। अब तक वाराणसी में सड़क हादसों में घायल 21 लोगों को ई-डीएआर योजना का लाभ मिल चुका है।

हादसे के बाद 112 पर कॉल करना सबसे जरूरी

सड़क दुर्घटना होने पर घायल या उसके साथ मौजूद लोग तत्काल डायल 112 पर सूचना दे सकते हैं। इसके बाद पुलिस और एंबुलेंस समन्वय के साथ घटनास्थल पर पहुंचेंगे। पुलिस अधिकारी हादसे से जुड़ी जानकारी ई-डीएआर पोर्टल पर दर्ज करने के साथ घायल की पेशेंट आईडी जेनरेट करेंगे।

पेशेंट आईडी तैयार होते ही संबंधित अस्पताल को इसकी जानकारी मिल जाएगी। घायल के अस्पताल पहुंचने पर कैशलेस उपचार की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। योजना का उद्देश्य हादसे के बाद शुरुआती समय में इलाज उपलब्ध कराकर घायल की जान बचाना है।

रमना हादसे में घायल विशाल को मिला योजना का लाभ

18 जुलाई को लंका थाना क्षेत्र में रमना के पास टोल प्लाजा के निकट दो बाइकों की टक्कर हो गई थी। हादसे में रोहनिया के कुरहुंवा निवासी विशाल घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती करा दिया था।

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना का विवरण दर्ज किया। पुलिस ने विशाल की पेशेंट आईडी जेनरेट कर उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग-2 स्थित हेरीटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया।

पुलिस के लौटने के बाद अस्पताल की ओर से इलाज के लिए रुपये लिए गए। बाद में पुलिस की पहल पर अस्पताल को 8,500 रुपये वापस करने पड़े। इस तरह घायल को योजना के तहत कैशलेस उपचार का लाभ मिला।

तीन अगस्त को चंदौली के घायल को भी मिला लाभ

इसी तरह तीन अगस्त को चेतगंज पुलिस ने चंदौली निवासी रमेश प्रसाद को भी योजना का लाभ दिलाया। पुलिस ने दुर्घटना से संबंधित जानकारी दर्ज कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद उन्हें कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सकी।

पुलिस के मुताबिक, अस्पताल भी घायल की पेशेंट आईडी तैयार कर सकते हैं, लेकिन उसे तभी मान्य माना जाएगा जब संबंधित थाना क्षेत्र के प्रभारी उसकी मंजूरी देंगे। थाना प्रभारी यह सत्यापित करेंगे कि दुर्घटना वास्तव में उनके क्षेत्र में हुई है और संबंधित व्यक्ति उसी हादसे में घायल हुआ है।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पुलिस की मंजूरी जरूरी

योजना में फर्जी दावों को रोकने के लिए पुलिस सत्यापन की व्यवस्था की गई है। यदि पुलिस की ओर से मंजूरी नहीं मिलती है तो अस्पताल में भर्ती घायल को इलाज का खर्च स्वयं उठाना पड़ सकता है।

यही वजह है कि सड़क हादसे के बाद पुलिस को तत्काल सूचना देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे दुर्घटना की पुष्टि के साथ ही ई-डीएआर पर समय से विवरण दर्ज किया जा सकेगा और घायल को योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

गोल्डन आवर में इलाज मिलने से बच सकती है जान

सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर माना जाता है। इस दौरान घायल को समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति में भी जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। इसी अवधि में आर्थिक परेशानी इलाज में बाधा न बने, इसके लिए प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत कैशलेस उपचार की व्यवस्था की गई है। योजना को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस की ओर से गोष्ठियां भी आयोजित की जा रही हैं, ताकि दुर्घटना के समय लोग सही प्रक्रिया अपनाएं और घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

चेतगंज थाने में पहली एफआईआर भी दर्ज

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के अनुसार, योजना के तहत जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद घायलों तक सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चेतगंज थाने में योजना से संबंधित पहली एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन आवर के भीतर इलाज उपलब्ध कराना और आर्थिक कारणों से उपचार में देरी को रोकना है।