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Varanasi : TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक निकाला मार्च

 
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वाराणसी। परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने गुरुवार को सड़कों पर उतरकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने टीईटी/सीटीईटी परीक्षा को अनिवार्य किए जाने के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग की।

दरअसल, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर सभी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में शिक्षकों में असंतोष देखा जा रहा है और वे लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं।

बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक मार्च

गुरुवार को Teachers Federation of India के बैनर तले बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पहुंचे। यहां से हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने “काला कानून वापस लो” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष कैलाश नाथ यादव ने किया। मौके पर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

‘50-55 वर्ष की उम्र में परीक्षा देना अव्यावहारिक’

शिक्षकों ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सरकार आरटीई अधिनियम 2017 में संशोधन कर वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी/सीटीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करे। उनका कहना है कि जिन्होंने 15 से 30 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी हैं, उन्हें 50-55 वर्ष की आयु में दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल असंगत है, बल्कि अव्यावहारिक भी है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि वह पुनर्विचार याचिका में मजबूती से शिक्षकों का पक्ष रखे और उन्हें इस अनिवार्यता से राहत दिलाए।