Movie prime

वाराणसी में बनेगा यूपी का पहला खादी प्लाजा, एक छत के नीचे मिलेंगे देशभर के खादी उत्पाद

वाराणसी: पूर्वांचल में खादी की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम ने यूपी का पहला खादी प्लाजा बनाने का निर्णय लिया है, जहां देशभर के खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद एक ही छत के नीचे मिलेंगे।

 
 यूपी का पहला खादी प्लाजा
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्षों से खादी वस्त्र और ग्रामोद्योग को बढ़ावा दिए जाने का असर अब ज़मीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। बदलते फैशन के साथ खुद को ढालते हुए खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, वाराणसी ने उत्तर प्रदेश का पहला खादी प्लाजा स्थापित करने का निर्णय लिया है।

क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम वाराणसी के मंत्री श्रीप्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री के खादी खरीदने के आह्वान का सीधा असर खादी भंडार की बिक्री पर पड़ा है। ताज होटल के सामने मिंट हाउस स्थित खादी भंडार की बिक्री वर्ष 2024–25 में बढ़कर 3.28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यदि इस खादी भंडार को खादी प्लाजा के रूप में विकसित किया जाए, तो खादी वस्त्रों और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में कई गुना वृद्धि संभव है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित खादी प्लाजा का निर्माण खादी आश्रम के चार मंजिला भवन में लगभग 3600 वर्गफुट क्षेत्र में किया जा सकता है। इस संबंध में मंत्री द्वारा खादी प्लाजा निर्माण का प्रस्ताव खादी ग्रामोद्योग आयोग के मंडलीय कार्यालय को सौंपा गया था। निदेशक के निर्देश पर सह निदेशक की टीम ने मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया, जिसे पूरी तरह व्यवहारिक पाया गया। इसके बाद मंडलीय कार्यालय ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, मुंबई के निदेशक (विपणन) को भेज दी है। अनुमति मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

एक ही छत के नीचे मिलेंगे देशभर के खादी उत्पाद

खादी प्लाजा में देश के विभिन्न राज्यों के खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां पुरुष, महिला और युवाओं के लिए रेडीमेड वस्त्र और ड्रेस मटेरियल की व्यापक रेंज होगी।

प्लाजा में बंगाल की मटका सिल्क, कटिया सिल्क, गरद सिल्क, जमदानी साड़ी, प्रिंटेड सिल्क और फाइन कॉटन; छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क; ओडिशा की कटक साड़ी और कांचा स्टिच; असम की अंडी सिल्क, मूंगा, स्कार्फ और चादर; कश्मीर की शॉल और चादर; गुजरात का पोलो कॉटन; महाराष्ट्र से राष्ट्रीय ध्वज; मैसूर से अगरबत्ती, परफ्यूम, चंदन माला और लकड़ी के उत्पादों के साथ आधुनिक हर्बल सौंदर्य प्रसाधन भी उपलब्ध होंगे।

खादी प्लाजा के निर्माण से न केवल स्थानीय कारीगरों को नया बाजार मिलेगा, बल्कि वाराणसी को खादी और ग्रामोद्योग के एक बड़े केंद्र के रूप में पहचान भी मिलेगी।