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वाराणसी : संपत्ति के लिए पत्नी की हत्या, शव पर नमक डालकर दफनाया था आंगन में, 5 साल बाद मिली पति को उम्रकैद

 
Varanasi Court
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वाराणसी। लोहता थाना क्षेत्र के भिटारी गांव में पत्नी की हत्या कर उसके शव को घर के आंगन में दफनाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मामले को जघन्य अपराध मानते हुए हत्या के साथ-साथ साक्ष्य छिपाने के आरोप में भी अतिरिक्त सजा और जुर्माना लगाया है।

अदालत ने दोषी राजेंद्र प्रसाद को हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं शव को दफनाकर साक्ष्य मिटाने के मामले में तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा और कुल 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

पांच साल पहले हुई थी वारदात

यह घटना 28 दिसंबर 2020 की है। मृतका आशा देवी के बेटे रामविलास ने अपने पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार घटना वाले दिन वह और उसका छोटा भाई अमर किसी काम से घर से बाहर गए थे।

दोपहर में जब अमर घर लौटा और मां के बारे में पूछा तो पिता ने बताया कि वह सोनार की दुकान गई हैं और जल्द लौट आएंगी। शाम को रामविलास ने भी मां के बारे में पूछा तो उसे भी यही जवाब मिला।

खून के छींटों ने खोला राज

रामविलास के मुताबिक, कुछ देर बाद उसने देखा कि उसके पिता घर के आंगन में एक जगह मिट्टी समतल कर रहे थे। पूछने पर उन्होंने कहा कि धूप सेंकने के लिए जगह तैयार कर रहे हैं।

इसी दौरान जब वह कमरे के अंदर गया तो वहां खून के छींटे दिखाई दिए। शक होने पर दोनों भाइयों ने आंगन में उस जगह की खुदाई शुरू की, जहां मिट्टी ताजा और नम थी। करीब चार फीट नीचे उन्हें अपनी मां का रक्तरंजित शव मिला, जिस पर नमक भी डाला गया था।

शव मिलने के बाद राजेंद्र प्रसाद मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

तीन दिन बाद हुई गिरफ्तारी

घटना के बाद फरार आरोपी को पुलिस ने तीन दिन बाद गिरफ्तार कर लिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आशा देवी के सिर और चेहरे पर 12 गंभीर चोटों के निशान मिले थे। जांच में सामने आया कि लकड़ी और धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या की गई थी।

पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके बाद मामला अदालत में चला।

संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि राजेंद्र प्रसाद अपनी पत्नी पर संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बना रहा था। जब आशा देवी ने इससे इनकार किया तो आरोपी ने उनकी हत्या कर दी।

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और 9 जून 2026 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इस फैसले को परिवार और स्थानीय लोगों ने न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।