वाराणसी के युवक ने बनाया हाईटेक पुलिस रोबोट, 30 सेकंड में बाइक से बन जाता है जांच अधिकारी का साथी
वाराणसी। अपराध स्थल तक समय पर पहुंचने, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अपराधियों की तलाश को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वाराणसी के नदेसर निवासी प्रीतम शर्मा ने एक अत्याधुनिक पुलिस रोबोट विकसित किया है। यह रोबोट पुलिस और फोरेंसिक जांच एजेंसियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह सामान्य स्थिति में एक बाइक जैसा दिखाई देता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर महज 30 सेकंड से एक मिनट के भीतर रोबोट में बदल जाता है।
प्रीतम शर्मा ने बताया कि एमिटी यूनिवर्सिटी, हरियाणा में फोरेंसिक साइंस की पढ़ाई के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने आने वाली चुनौतियों को करीब से समझने के बाद उन्हें इस रोबोट को बनाने का विचार आया। उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये की निजी लागत से इसे तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह 'मेक इन इंडिया' की अवधारणा पर आधारित है।
इससे पहले भी प्रीतम बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशनल रोबोट और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नर्सिंग रोबोट विकसित कर चुके हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसे नवाचारों को सरकारी और संस्थागत सहयोग मिले तो भविष्य में पुलिसिंग और फोरेंसिक जांच अधिक तेज, सुरक्षित और तकनीक आधारित हो सकती है।
रोबोट को पुलिसकर्मी मैन्युअल रूप से चला सकते हैं, वहीं आवश्यकता पड़ने पर यह स्वतः भी अपराध स्थल तक पहुंच सकता है। इसमें डिजिटल एफआईआर दर्ज करने, केस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, अपराध स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग, जियो टैगिंग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और साक्ष्य संरक्षण जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।
रोबोट के पीछे लगा ड्रोन सिस्टम भाग रहे अपराधियों की संभावित दिशा में निगरानी और ट्रैकिंग करने में सक्षम है। वहीं, विशेष रूप से तैयार किया गया एविडेंस बॉक्स महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में मदद करता है, जिससे जांच प्रक्रिया और अधिक विश्वसनीय बन सकती है।
रोबोट की प्रमुख खूबियां
- 30 सेकंड से 1 मिनट में बाइक से रोबोट में बदलने की क्षमता।
- ऑटोमैटिक और मैन्युअल दोनों मोड में संचालन।
- डिजिटल एफआईआर दर्ज करने की सुविधा।
- केस रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटल संग्रह।
- अपराध स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन।
- जियो टैगिंग सिस्टम।
- साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए विशेष एविडेंस बॉक्स।
- ड्रोन आधारित निगरानी और ट्रैकिंग।
- वॉयस कमांड से संचालन।
- बारिश से बचाव के लिए ऑटो कैनोपी सिस्टम।
- आग लगने पर स्वतः सक्रिय होने वाला फायर सेफ्टी सिस्टम।
- एंटी-थेफ्ट सुरक्षा प्रणाली।
इन तकनीकों का हुआ उपयोग
इस हाईटेक रोबोट में रास्पबेरी पाई 5 (4GB), आर्डुइनो नैनो, मोटर ड्राइवर सिस्टम, ब्लूटूथ कनेक्टर, सीन डिटेक्टर सेंसर, वाई-फाई जैमर मॉड्यूल, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, सीसीटीवी सर्विलांस, ड्रोन इंटीग्रेशन, वॉयस कमांड सिस्टम, डिजिटल एफआईआर मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक फायर सेफ्टी, एंटी-थेफ्ट सिस्टम, स्मार्ट रेन प्रोटेक्शन सिस्टम और 24 वोल्ट मोटर ड्रिवन व्हील सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है।
दुनिया में भी बढ़ रहा है पुलिस रोबोट का इस्तेमाल
अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां निगरानी, बम निष्क्रिय करने, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। वाराणसी में विकसित यह स्वदेशी मॉडल विशेष रूप से अपराध स्थल प्रबंधन और फोरेंसिक जांच को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो भविष्य में भारतीय पुलिस व्यवस्था के लिए एक उपयोगी नवाचार साबित हो सकता है।
