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रोड एक्सीडेंट में हेड कांस्टेबल का पूरा परिवार खत्म, जनाजे में दोस्त की भी सदमे से मौत

दर्दनाक सड़क हादसे में हेड कांस्टेबल अशरफ जावेद की पत्नी और चार बच्चों की मौत के बाद, जनाज़े के दौरान उनके करीबी दोस्त महमूद की भी सदमे से मौत हो गई। छह मौतों ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया और माहौल बेहद भावुक हो गया।

 
लोहता हादसा
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वाराणसी: दर्दनाक सड़क हादसे में हेड कांस्टेबल अशरफ जावेद की पत्नी और चार बच्चों की मौत से पहले ही गम में डूबा परिवार गुरुवार को उस समय पूरी तरह टूट गया, जब जनाज़े के दौरान अशरफ के करीबी दोस्त महमूद उर्फ सब्बू (55) की भी सदमे से मौत हो गई। पांच मौतों का मातम छठी मौत से चीख-पुकार में बदल गया।

अशरफ जावेद, आज़मगढ़ के अतरौला थाने में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं, उनका परिवार लखनऊ जा रहा था। पत्नी गुलिस्ता चांदनी, बेटी इस्मा (22), समरीन (10), इलमा (8) और बेटा जियान (10) के साथ उनका साला जिशान कार में थे। बाराबंकी में नाश्ते के बाद जैसे ही सभी वैगनआर में बैठे, पीछे से तेज रफ्तार ब्रेज़ा ने जोरदार टक्कर मारकर कार को काफी दूर तक घसीटा। सीएनजी कार में भीषण आग लग गई और देखते ही देखते पांचों की जलकर मौत हो गई।

इस खौफनाक खबर के बाद अशरफ के साथ उनका सबसे करीबी दोस्त महमूद बाराबंकी पहुंचा। मृतकों का भयावह मंजर देखकर उसकी हालत बिगड़ गई, मगर वह दोस्त को संभालता रहा। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव जब रहीमपुर पहुंचे, तो वहां पहले से ही भारी भीड़ उमड़ चुकी थी। पांच जनाज़ों ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।

धन्नीपुर कब्रिस्तान में नमाज़ के बाद जब सभी शवों को सुपुर्दे-ख़ाक किया जा रहा था, तभी बच्चों की कब्रों के पास महमूद का सब्र टूट गया। जोर-जोर से रोते हुए वह वहीं गिर पड़ा। परिजन और जनाज़े में शामिल लोग उसे पास के चिकित्सक के पास ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि सदमे के कारण उसे दिल का दौरा पड़ा।

महमूद अशरफ के परिवार को अपना परिवार मानता था। अशरफ के बच्चे भी उसे चाचा की तरह प्यार करते थे और अधिकतर समय उसी के साथ बिताते थे। बच्चों को खोने का दुख वह झेल नहीं सका और उनकी सुपुर्दगी के दौरान ही उसकी सांसें थम गईं।

छह मौतों ने अशरफ जावेद और रहीमपुर गांव में ऐसा मातम छोड़ा है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।