काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित हुई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जानें क्या है इसकी खासियत
वाराणसी: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में शनिवार को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई। यह घड़ी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा भेंट की गई है, जिसे मंदिर चौक स्थित शिवार्चनम मंच के पास स्थापित किया गया। यह घड़ी भारतीय कालगणना की प्राचीन परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए समय मापन का नया आयाम प्रस्तुत करती है, जिससे श्रद्धालुओं और आम लोगों को वैदिक समय की जानकारी मिल सकेगी।
12 ज्योतिर्लिंगों में स्थापना का अभियान
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की शुरुआत मध्य प्रदेश के उज्जैन से हुई थी, जिसे महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है। वहां स्थापना के बाद अब इसे देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों में स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
उसी क्रम में अब काशी विश्वनाथ धाम में इसकी स्थापना की गई है, जिससे यह धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल बन गई है।
कैसे काम करती है वैदिक घड़ी? जानें इसकी खासियत
यह वैदिक घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की स्थिति के आधार पर समय की गणना करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घड़ी सूर्योदय के साथ संचालित होती है, यानी जिस स्थान पर सूर्योदय का समय होता है, उसी के अनुसार वहां की कालगणना निर्धारित होती है।
इसके साथ ही मोबाइल एप के माध्यम से देश के अलग-अलग शहरों के लिए वैदिक समय की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह भारतीय खगोलशास्त्र और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। गौरतलब है कि इस घड़ी का लोकार्पण वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था।
3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सप्ताहांत और सुहाने मौसम के चलते काशी विश्वनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। शनिवार को तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए। मंदिर परिसर में मैदागिन से गोदौलिया और चर्च से दशाश्वमेध तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। हर ओर “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
मंदिर प्रशासन ने बढ़ती भीड़ और गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र के अनुसार, मंदिर परिसर में जर्मन हैगर, फर्श पर मैट, कूलर और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कतार में लगे भक्तों को पानी, इलेक्ट्राल और ओआरएस का घोल भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
