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काशी में विक्रमोत्सव का हुआ आगाज, जीवंत हुई सम्राट विक्रमादित्य की गाथा, CM योगी को भेंट की गई वैदिक घड़ी

 
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वाराणसी। काशी में विक्रमोत्सव 2026 के तहत भव्य महानाट्य का शानदार आगाज़ हो गया है। इस विशेष आयोजन का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के दौरान काशी की धरती पर संस्कृति, इतिहास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सीएम योगी को भेंट की गई वैदिक घड़ी

इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह विशेष घड़ी भारतीय काल गणना पद्धति पर आधारित है, जिसमें दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है।
बताया गया कि यह घड़ी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित की जाएगी, जो भारतीय परंपरा और विज्ञान के संगम का प्रतीक बनेगी।

मृदंगम की धुन से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत मृदंगम की मधुर धुन के साथ हुई, जिसमें 21 कलाकारों ने सामूहिक प्रस्तुति दी। इसके बाद मंच पर मटका नृत्य सहित कई पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। MP-UP के बीच संबंध होंगे मजबूत- सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस आयोजन से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच सांस्कृतिक और विकासात्मक संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने बताया कि इस महानाट्य में डॉक्टर, इंजीनियर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लोग भी कलाकार के रूप में जुड़े हैं, जो सम्राट विक्रमादित्य की विरासत को जीवंत बनाने के लिए समर्पित हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में फिल्मों की दिशा बदल रही है। अब सही को सही और गलत को गलत दिखाया जा रहा है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि अयोध्या की खोज भी उनसे जुड़ी हुई है और इसके शास्त्रीय प्रमाण मौजूद हैं।

भव्य मंचन में दिखेगा जीवंत इतिहास

इस महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं, जो सम्राट विक्रमादित्य की गाथा को मंच पर जीवंत करेंगे। आयोजन में हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन भारतीय परंपराओं और युद्ध दृश्यों का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और इतिहास को आधुनिक मंचन के जरिए दर्शाने का एक अनूठा प्रयास है।

तीन मंचों पर होगा अद्भुत प्रदर्शन

महानाट्य के लिए तीन अलग-अलग मंच तैयार किए गए हैं, जिन पर ‘सिंहासन बत्तीसी’, ‘बेताल पच्चीसी’ और ‘भविष्य पुराण’ के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

कार्यक्रम में 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊंट, एक पालकी और एक हाथी प्रस्तुति को और भी जीवंत बनाएंगे। इसके साथ ही 27 फीट ऊंचा सिंहासन इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है।

संस्कृति का जीवंत उत्सव

विक्रमोत्सव 2026 न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की समृद्ध विरासत और इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रयास भी है। काशी में आयोजित यह महोत्सव दर्शकों को एक अनोखा और भव्य अनुभव दे रहा है।