एक से तीन लोगों तक पहुंच रहा वायरल संक्रमण, BHU में 109 स्वाइन फ्लू मरीजों की पुष्टि, 59 वाराणसी के
वाराणसी और आसपास के जिलों में इन दिनों वायरल बुखार के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुई जांच में अब तक 109 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें 53 मरीज वाराणसी के हैं, जबकि 56 मरीज पूर्वांचल के दूसरे जिलों से हैं। वाराणसी में मिले संक्रमितों में 15 बच्चे और 20 महिलाएं भी शामिल हैं।
एक अगस्त से सात सितंबर के बीच पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से कुल 405 सैंपल जांच के लिए बीएचयू भेजे गए थे। इनमें से 109 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक संक्रमित मरीजों में कुछ का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जबकि कई मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है।
11 मरीज अस्पताल में भर्ती
सीएमओ डॉ. एनपी सिंह के अनुसार, पिछले एक महीने में बीएचयू में स्वाइन फ्लू के 33 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 22 मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। फिलहाल 11 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें नौ मरीज बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और दो मरीज मंडलीय अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है।
वायरल मरीजों की संख्या ज्यादा, लेकिन जांच की रफ्तार धीमी
अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद संदिग्ध मरीजों की जांच अपेक्षाकृत कम हो रही है। मंडलीय अस्पताल में रोजाना करीब 1500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से लगभग 10 मरीजों के ही सैंपल स्वाइन फ्लू की जांच के लिए लिए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल, एलबीएस अस्पताल रामनगर, सीएचसी-पीएचसी और निजी अस्पतालों में भी वायरल बुखार के मरीजों की भीड़ बनी हुई है। मंगलवार को सरकारी और निजी अस्पतालों में 2500 से अधिक वायरल मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
एक मरीज से पूरे परिवार तक फैल रहा संक्रमण
वायरल संक्रमण का असर अब एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह रहा। परिवार में एक सदस्य के बीमार पड़ने के बाद दूसरे सदस्यों में भी जुकाम, खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
चोपन की ऊषा अपने बड़े बेटे का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचीं। बेटे को भर्ती कराना पड़ा। इसी दौरान ऊषा और उनके छोटे बेटे को भी वायरल बुखार हो गया। अब परिवार के तीनों सदस्य इलाज करा रहे हैं।
इसी तरह राजातालाब की कुसुमलता तीन दिनों से बुखार और जुकाम से परेशान थीं। उन्होंने दो दिन तक मेडिकल स्टोर से दवा ली, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद उनके पति और बेटे में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देने लगे। मंगलवार को अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने कई जांचें लिखीं।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचें
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनीष यादव के मुताबिक बारिश और बाढ़ के बाद वायरल इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़े हैं। इंफ्लूएंजा और पैराइंफ्लूएंजा वायरस के कारण जुकाम, खांसी, बदन दर्द और तेज बुखार जैसे लक्षण हो सकते हैं। इस बार कई मरीजों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी सामने आ रही है।
डॉक्टरों ने लोगों को बिना सलाह के दवाएं, खासकर एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है और इलाज मुश्किल हो सकता है।
ठीक होने में लग रहे करीब 15 दिन
डॉक्टरों के मुताबिक इस बार कई मरीजों को वायरल बुखार से पूरी तरह ठीक होने में करीब 15 दिन तक का समय लग रहा है। कुछ मरीजों में पैरासिटामोल से भी बुखार आसानी से नियंत्रित नहीं हो रहा है।
प्लेटलेट्स कम होने के कारण डॉक्टर डेंगू समेत दूसरी गंभीर बीमारियों की भी जांच करा रहे हैं। हालांकि कई मरीजों में प्लेटलेट्स कम पाए जाने के बावजूद डेंगू या किसी अन्य गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी सामने आई है।
जांच के लिए 35 मिनट तक इंतजार
अस्पतालों में वायरल मरीजों की बढ़ती संख्या का असर जांच व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। मंडलीय और जिला अस्पताल में मंगलवार को रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर पैथोलॉजी और दवा काउंटर तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं।
लैब के बाहर भी मरीजों और तीमारदारों की भीड़ रही। कई लोगों को जांच कराने के लिए करीब 35 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
सीएमओ डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी पर दवाओं और जरूरी जांच किट की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखकर निगरानी में इलाज किया जा रहा है।
