वाराणसी में दिहाड़ी मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन, मनरेगा बहाल करने और 'जी राम जी' कानून रद्द करने की मांग
वाराणसी I महात्मा गांधी की शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर दिहाड़ी मजदूर संगठन एवं लोक समिति वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में राजातालाब में सैकड़ों दिहाड़ी मजदूरों ने रोजगार और मजदूर अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। विभिन्न गांवों से पहुंचे मजदूरों ने जीटी रोड के किनारे एकत्र होकर गांधी जी की शहादत दिवस मनाई और सर्वधर्म प्रार्थना के साथ सभा का आयोजन किया।
प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा योजना को तत्काल बहाल करने, मजदूर विरोधी श्रम कानूनों को रद्द करने और विशेष रूप से 'विकसित भारत-जी राम जी' (VB-G RAM G) कानून को वापस लेने की जोरदार मांग की। इस दौरान उन्होंने "रोटी कपड़ा और मकान मांग रहा मजदूर किसान", "हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो", "गांधी जी का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान", "मनरेगा कानून बहाल करो" और "जी राम राम कानून वापस लो" जैसे नारे लगाए।

मजदूरों का आरोप था कि सरकार की नीतियों के कारण दिहाड़ी मजदूर बेरोजगारी, भूख और पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने कहा, "गांधी जी के देश में मजदूरों से उनका हक छीना जा रहा है। मनरेगा को कमजोर करना गरीबों पर सीधा हमला है। सरकार पूंजीपतियों के लिए कानून बना रही है और मजदूरों को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया गया है। अगर मनरेगा बहाल नहीं हुई और मजदूर विरोधी जी राम जी कानून वापस नहीं लिया गया तो दिहाड़ी मजदूर सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे।"
कार्यक्रम के दौरान खेतिहर घरेलू कामगार महिला मजदूर संगठन का ब्लॉक स्तरीय चुनाव भी संपन्न हुआ। इसमें बढेनी से सरिता को उपाध्यक्ष, हरपुर से रानी को उपाध्यक्ष, हरसोस से रंजना को सचिव, नागेपुर से ममता को कोषाध्यक्ष तथा बेनीपुर से सुमन, चौखंडी से चंदा और दउरा से बनीता को संगठन मंत्री चुना गया। सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का अंगवस्त्र और माला पहनाकर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में अनीता सोनी, मनीषा, आशा राय, रामबचन, सुमन, सपना, संध्या, सबीना, गीता, ममता, सरिता, बदामा, उर्मिला, हीरावती आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
यह प्रदर्शन दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज न करने का स्पष्ट संदेश देता है। उनकी मांगें न केवल मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह सरकार को गरीबों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की याद दिलाती हैं। मनरेगा की बहाली और श्रम कानूनों में सुधार की आवश्यकता अब और अधिक महसूस की जा रही है। यह आंदोलन मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर अपने हक के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा भी देता है। मजदूरों की आवाज सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि समाज में समानता और न्याय की स्थापना हो सके।
