‘We Will Do It’ मंत्र के साथ PM मोदी ने दिया विकसित भारत 2047 का संकल्प, काशी में गूंजे ‘मोदी-मोदी’ के नारे
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से कार्यकर्ताओं और सेवा यात्रियों को संबोधित किया। श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के अपने विजन को दोहराते हुए इसे साकार करने के लिए देश के युवाओं और 140 करोड़ नागरिकों का साथ मांगा।
काशी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सभागार में गुजरात के वडनगर से पहुंचे करीब 500 सेवा यात्रियों के साथ भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के लिए मौजूद रहे। युवाओं और जेन-जी को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने “We Will Do It” का मंत्र दिया। पीएम के इस आह्वान के बाद सभागार में मौजूद युवाओं ने ‘मोदी-मोदी’ के नारों के बीच विकसित भारत 2047 के निर्माण का संकल्प दोहराया।
प्रधानमंत्री ने सुबह करीब 10:27 बजे अपना संबोधन शुरू किया, जो लगभग एक घंटे तीन मिनट तक चला। उनके स्क्रीन पर आते ही संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सभागार में ‘जय श्रीराम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूंज उठे।
प्रधानमंत्री ने अपने करीब 25 वर्षों के शासन और सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए गुजरात मॉडल, भारत की सांस्कृतिक विरासत और विकसित भारत के लक्ष्य पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का संकल्प होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सेवा संकल्प यात्रा में शामिल युवाओं का भी अभिनंदन किया और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का स्वागत किया।
नितिन नवीन ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कोरोना काल के दौरान केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन, किसानों को सम्मान निधि और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने स्टार्टअप और आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, रविंद्र जायसवाल, रमेश सिंह, विधायक नीलकंठ तिवारी, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, अश्वनी त्यागी और भाजपा महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि समेत कई नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
वडनगर से आए सेवा यात्रियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान वडनगर से काशी पहुंचे सेवा यात्रियों का सम्मान भी किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश सह प्रभारी जगदीश पटेल की मौजूदगी में यात्रा से जुड़े प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में दल के प्रभारी सूरत के ध्रुविन पटेल, आकाश तदवी, विपिन तलाविया, बड़ोदरा के नितिन सिंह बरड, मौलिक देसाई, हर्ष पंड्या, राजेश कुमार चौधरी, डॉ. चिंतन चौधरी, महिसाणा के श्रेयष पटेल, सनी शाह, डॉ. यश पटेल, दीक्षित चौधरी, अजय राज सिंह जडेजा, निकुंजभाई ठाकोर और कुलदीप बारोट समेत करीब 25 लोग शामिल रहे।
‘कभी नहीं सोचा था हेड ऑफ गवर्नमेंट बनूंगा’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इतने लंबे समय तक सरकार का नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने कहा कि एनडीए के सहयोगी दलों, भाजपा कार्यकर्ताओं और देश की जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें यह जिम्मेदारी निभाने का अवसर दिया।
‘ईश्वर से इतनी शक्ति मांगी कि आपकी सेवा कर सकूं’
प्रधानमंत्री ने श्री विनायक मंदिर में की गई पूजा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने देशवासियों के साथ अपने लिए भी प्रार्थना की है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से उन्होंने इतनी शक्ति मांगी है कि वह जनता की सेवा करते रहें।
प्रधानमंत्री ने जनता को ईश्वर का रूप बताते हुए कहा कि जनसेवा ही उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रही है। उनकी इस बात पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सभागार में एक बार फिर ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूंजने लगे।
वडनगर के स्कूल से सीखा अनुशासन
पीएम मोदी ने वडनगर में अपने स्कूली जीवन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में वह कभी देरी से नहीं पहुंचते थे और बचपन में सीखा अनुशासन तथा नियमितता आज भी उनके जीवन का हिस्सा है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतरता और जिम्मेदारी की भावना बेहद जरूरी है।
आलोचकों का भी जताया आभार
प्रधानमंत्री ने अपने समर्थकों के साथ आलोचकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें जिताया, उन्होंने विनम्रता सिखाई और जिन परिस्थितियों ने गिराया, उन्होंने दोबारा खड़ा होना सिखाया।
पीएम ने कहा कि शुभचिंतकों के प्रोत्साहन के साथ आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकने का अवसर दिया। समर्थकों ने विश्वास की शक्ति दी तो विरोध ने लोकतंत्र की ताकत समझाई।
उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों का सफर उनके धैर्य की परीक्षा भी रहा है और इसी अनुभव ने उन्हें बड़े संकल्प लेने तथा अधिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का साहस दिया है। सभागार में मौजूद कई युवा प्रधानमंत्री के संबोधन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करते नजर आए।
वेद से विवेकानंद तक का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और दर्शन का उल्लेख करते हुए वेदों से लेकर स्वामी विवेकानंद के विचारों तक की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सनातन भारत ने दुनिया को मानवता और विश्वास का संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे महान राष्ट्र की सेवा करते हुए उन्होंने कभी स्वयं को अकेला महसूस नहीं किया। देश की जनता का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
