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BHU अस्पताल में मुंह बांधकर पहुंचे युवकों ने की डॉक्टरों से मारपीट, 200 मरीज बिना इलाज लौटे

वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में गैस्ट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में डॉक्टरों से मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ युवक मरीज को पहले दिखाने को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों से भिड़ गए। घटना के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी छोड़ दी, जिससे करीब 200 मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।

 
BHU अस्पताल
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वाराणसी: बीएचयू अस्पताल स्थित आईएमएस के गैस्ट्रोलॉजी विभाग में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ युवकों पर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। घटना सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी में हुई, जिसके बाद नाराज डॉक्टर ओपीडी छोड़कर चले गए। इसके चलते बड़ी संख्या में मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा।

बताया जा रहा है कि दोपहर करीब एक बजे गैस्ट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी थी। विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव और अन्य रेजिडेंट डॉक्टर अलग-अलग कमरों में मरीजों का इलाज कर रहे थे। इसी दौरान 5 से 6 युवक वहां पहुंचे और एक मरीज को तुरंत दिखाने की मांग करने लगे।

पहले मरीज दिखाने’ को लेकर बढ़ा विवाद

डॉक्टरों ने युवकों को बताया कि मरीजों को निर्धारित नंबर के अनुसार ही देखा जाएगा। आरोप है कि इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई, जो बाद में हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान ओपीडी में मौजूद मरीज और तीमारदार घबरा गए और वहां से बाहर निकलने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के बाद कुछ देर के लिए ओपीडी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आरोप है कि घटना को अंजाम देने के बाद युवक मौके से फरार हो गए।

दोबारा पहुंचे युवक, फिर हुई हाथापाई

विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश प्रकाश यादव के मुताबिक, दोपहर में हुई पहली घटना के करीब दो घंटे बाद वही युवक फिर से विभाग पहुंचे और दोबारा विवाद की स्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना तुरंत प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कंट्रोल रूम को दी गई थी, लेकिन काफी देर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

डॉक्टरों का आरोप है कि सूचना देने के लगभग पांच घंटे बाद शाम को प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से संपर्क किया गया और घटना की जानकारी ली गई।

200 मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा

घटना से नाराज रेजिडेंट डॉक्टरों और विभागीय चिकित्सकों ने ओपीडी छोड़ दी। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा। अस्पताल पहुंचे करीब 200 मरीजों और उनके परिजनों को इलाज कराए बिना वापस लौटना पड़ा। मरीजों का कहना था कि लंबे इंतजार के बाद भी इलाज नहीं हो सका, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के दौरान वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विवाद और मारपीट के दौरान सुरक्षा कर्मी मूकदर्शक बने रहे और समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सके। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

जांच और कार्रवाई की बात

आईएमएस बीएचयू के प्रभारी निदेशक प्रो. संजय गुप्ता ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की जांच कराई जाएगी। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार से ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हों, इसके लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड से समन्वय कर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।