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फेंसेडिल कफ सिरप तस्करी केस: STF की रडार पर 3 नए संदिग्ध, असम तक जुड़े तस्करी के तार

पूर्वांचल में फेंसेडिल कफ सिरप तस्करी का नेटवर्क और गहरा पाया गया है। शुभम जायसवाल, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा सहित 3 और संदिग्धों की भूमिका सामने आई है। गिरोह ने 10 जिलों में 100 करोड़ से अधिक का अवैध कारोबार किया। एसटीएफ फर्मों, निवेश और नेटवर्क की जांच तेज कर चुकी है।

 
फेंसेडिल कफ सिरप तस्करी केस
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वाराणसी: पूर्वांचल में फेंसेडिल कफ सिरप की बड़ी तस्करी का पर्दाफाश होने के बाद इस केस में नए खुलासे लगातार सामने आ रहे हैं। STF की जांच में पता चला है कि शुभम जायसवाल, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और तस्कर अमित सिंह टाटा के अलावा तीन और संदिग्ध इस नेटवर्क से जुड़े थे। STF अब इन सभी पर तथ्य जुटा रही है। जांच में खुले तार असम तक जा रहे हैं, जहां एक संदिग्ध फर्म भी पंजीकृत मिली है।

STF सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही और अन्य जिलों में फेंसेडिल की बड़ी सप्लाई करता था। गिरोह ने पूर्वांचल की 173 फर्मों को कफ सfरप बेचा। सिर्फ वाराणसी में 126 फर्में, जौनपुर में 28, आजमगढ़ में 3, चंदौली में 7, गाजीपुर में 5 और भदोही में 4 फर्में इस रैकेट से जुड़ी पाई गईं। कई फर्में बंद थीं, लेकिन उनके नाम का इस्तेमाल सप्लाई के लिए किया जाता था। STF को अभी भी बनारस की 40 फर्मों का रिकॉर्ड नहीं मिला, जिन पर मुकदमे दर्ज हैं।

जांच में सामने आया कि गिरोह ने वाराणसी और आसपास के 10 जिलों को अपना बेस बनाया, जहां 100 करोड़ रुपये से अधिक का काला कारोबार हुआ। सबसे अधिक लेन-देन शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल के नाम से पाया गया।

उधर, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह की भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है। उसने पिछले एक साल में लखनऊ में लगभग 15 करोड़ रुपये निवेश किए। कफ सीरप तस्करी में पहले 5 लाख रुपये लगाकर 25 लाख कमाने के बाद वह इस सिंडिकेट में गहराई से शामिल हो गया। करोड़ों की कमाई के बाद उसने राजधानी में मकान, जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदनी शुरू कीं। मई-जून में उसने सुल्तानपुर रोड पर नया मकान खरीदा था, जहां गृह प्रवेश भी किया गया।

अब STF उसकी संपत्तियों, बैंक ट्रांजेक्शनों और पंजीकृत दो फर्मों की पूरी जांच कर रही है। मामले में उसका नाम खुलते ही आलोक फरार हो गया है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए कई जगह दबिश दे रही है। पूर्वांचल में अब तक इस केस से जुड़े 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जबकि बाकी फर्मों की जांच जारी है।