मैट्रीमोनियल साइट पर प्यार का जाल, फिर ‘विदेशी गिफ्ट’ के नाम पर ठगी, वाराणसी साइबर पुलिस ने गैंग के 2 शातिर दबोचे
वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए महिलाओं को झांसे में लेकर फर्जी कस्टम अधिकारी बन साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है। बिहार से गैंग के सरगना समेत दो शातिर गिरफ्तार किए गए हैं। जांच में 500 फर्जी बैंक खातों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है।
वाराणसी: साइबर क्राइम पुलिस ने मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में गैंग के सरगना समेत दो शातिर साइबर अपराधियों को बिहार के मोतिहारी से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद हुई है।
मैट्रीमोनियल वेबसाइट से शुरू होता था ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब 13 मार्च 2026 को वाराणसी की एक महिला ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए उसकी बातचीत एक व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को विदेश में रहने वाला बड़ा कारोबारी बताया।
कुछ दिनों बाद आरोपी ने महिला को विदेश से महंगे गिफ्ट भेजने की बात कही। इसके बाद गैंग के अन्य सदस्य फर्जी कस्टम अधिकारी, जीएसटी अधिकारी और ड्रग विभाग के अधिकारी बनकर महिला से अलग-अलग बहाने से पैसे वसूलने लगे। इसी तरह महिला से लाखों रुपये की ठगी कर ली गई। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम वाराणसी में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर बनी विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान और अपर पुलिस उपायुक्त अपराध नृपेन्द्र के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध विदुष सक्सेना के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कचहरी क्षेत्र और शिवपुर इलाके में लगातार जांच और निगरानी की। पुलिस ने 31 मई 2026 को बिहार के मोतिहारी से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे करते थे महिलाओं को शिकार
जांच में सामने आया कि आरोपी पहले अलग-अलग मैट्रीमोनियल वेबसाइट पर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इसके बाद वे महिलाओं से दोस्ती कर भरोसा जीतते थे। खुद को विदेश में रहने वाला बिजनेसमैन बताकर महंगे गिफ्ट भेजने का झांसा दिया जाता था।
फिर गैंग के अन्य सदस्य फर्जी कस्टम अधिकारी, जीएसटी अधिकारी और ड्रग अधिकारी बनकर फोन करते थे और पार्सल छुड़ाने के नाम पर पैसे मांगते थे। महिलाएं झांसे में आकर रकम ट्रांसफर कर देती थीं। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम को गैंग फर्जी म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर घुमाता था और बाद में नकदी निकाल ली जाती थी।
500 फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल
अब तक की जांच में यह खुलासा हुआ है कि गैंग ने अपने नेटवर्क के जरिए करीब 500 फर्जी म्यूल बैंक खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर और रोटेट की जाती थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्वी चंपारण, बिहार निवासी 28 वर्षीय विजय कुमार और 19 वर्षीय रोहित रंजन शामिल हैं। विजय कुमार आठवीं तक पढ़ा है, जबकि रोहित रंजन बीटेक का छात्र बताया गया है।
दोनों आरोपियों के खिलाफ वाराणसी साइबर क्राइम थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस अन्य आपराधिक मामलों में उनकी संलिप्तता की भी जांच कर रही है।
मोबाइल फोन और नकदी बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 10,200 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल फोन की डिजिटल जांच की जा रही है ताकि गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह, निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, उपनिरीक्षक संजीव कनौजिया, उपनिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार समेत साइबर क्राइम टीम के कई पुलिसकर्मी शामिल रहे।
