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4,500 सिम कार्ड, चीन का मैलवेयर: अहमदाबाद के ₹1.5 करोड़ Boss Scam में सामने आया पाकिस्तान कनेक्शन 

अहमदाबाद के ₹1.5 करोड़ बॉस स्कैम की जांच में बड़ा साइबर नेटवर्क सामने आया है। पुलिस ने करीब 4,500 सिम कार्ड, 251 साइबर शिकायतों और चीन-पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध कनेक्शन का पता लगाया है। पश्चिम बंगाल से दो आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। नेटवर्क पर OTP और डिजिटल सेवाएं साइबर अपराधियों को देने का आरोप है।

 
Ahmedabad Boss Scam
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Ahmedabad Boss Scam: गुजरात के अहमदाबाद में सामने आए ₹1.5 करोड़ के ‘बॉस स्कैम’ की जांच ने साइबर ठगी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस जांच में करीब 4,500 सिम कार्ड, 251 साइबर शिकायतों और चीन, पाकिस्तान, भारत व हांगकांग से जुड़े संदिग्ध साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर का पता चला है। इस मामले में पश्चिम बंगाल से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

CEO बनकर कर्मचारी से कराई ₹1.5 करोड़ की ठगी

मामले की शुरुआत जून में हुई, जब साइबर ठगों ने एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हुए कर्मचारी को भुगतान के निर्देश दिए। ठगी के जरिए करीब ₹1.5 करोड़ ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के बाद अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब ₹1.3 करोड़ की रकम बरामद कर पीड़ित को वापस करा दी।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि यह किसी एक गिरोह की सामान्य ठगी नहीं, बल्कि दूसरे साइबर अपराधियों को सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, OTP और डिजिटल अकाउंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है।

पश्चिम बंगाल से दो आरोपित गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी इमरान अली पियादा और कोलकाता के इंजामुल मुजीबर मोल्ला को गिरफ्तार किया। आरोपितों के पास से आठ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए। इनमें एक ऐसा उपकरण भी मिला, जिसमें एक साथ चार सिम कार्ड संचालित किए जा सकते थे।

पुलिस के तकनीकी विश्लेषण में करीब 4,500 सिम कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। इन नंबरों की जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 251 शिकायतों का भी पता चला। ये शिकायतें देश के 26 राज्यों से संबंधित बताई गई हैं।

ऐसे काम करता था ‘बॉस स्कैम’

जांच के मुताबिक, ठगी के इस तरीके में पहले कंपनी के CEO, निदेशक या किसी वरिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाया जाता था। उन्हें WhatsApp या ईमेल के जरिए कोई ZIP फाइल भेजी जाती थी। इसे जरूरी आधिकारिक या बैंकिंग दस्तावेज बताया जाता था।

पुलिस के अनुसार, फाइल में मौजूद संदिग्ध executable फाइल खुलने के बाद हमलावर WhatsApp Web से जुड़े सिस्टम तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के कर्मचारियों को तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए जाते थे। ठगी की सबसे बड़ी ताकत भरोसा और जल्दबाजी थी। कर्मचारी संदेश को अपने वरिष्ठ अधिकारी का निर्देश समझकर रकम ट्रांसफर कर देते थे और स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाते थे।

डमी सिम और OTP बने नेटवर्क की रीढ़

पुलिस जांच में डमी सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, OTP और WhatsApp अकाउंट की पूरी सप्लाई चेन सामने आई है। आरोप है कि ग्राहकों की बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर उनके नाम पर सिम जारी किए गए और बाद में इन नंबरों का इस्तेमाल दूसरे लोगों के लिए किया गया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, इन नंबरों पर आने वाले OTP का इस्तेमाल WhatsApp अकाउंट और अन्य ऑनलाइन सेवाओं को सक्रिय करने में किया जाता था। पुलिस का आरोप है कि इस तरह तैयार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।

हजारों OTP बेचने का भी आरोप

पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने पिछले करीब पांच वर्षों में लगभग 21,000 OTP ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग सेवाओं के लिए बेचे। इसके अलावा करीब 900 OTP WhatsApp अकाउंट एक्टिवेशन के लिए उपलब्ध कराए जाने का भी आरोप है। पुलिस अभी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और कुल लेनदेन की जांच कर रही है।

चीन और पाकिस्तान तक जुड़े साइबर तार

जांच में इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क में चीन में विकसित मालवेयर और हांगकांग से संचालित साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। वहीं, एक कॉल सेंटर का कनेक्शन पाकिस्तान के इस्लामाबाद से भी सामने आया है। ठगी की रकम को कई देशों के रास्ते घुमाकर वास्तविक मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश किए जाने की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने इस मामले की जांच में इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के साथ भी समन्वय शुरू किया है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला साइबर अपराध के ऐसे मॉडल की ओर इशारा करता है, जिसमें अपराधियों को सीधे ठगी करने के बजाय उन्हें सिम, OTP और डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

पुलिस की लोगों से अपील

अहमदाबाद पुलिस ने लोगों और कंपनियों को ऐसे संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, बॉस या किसी सरकारी संस्था के नाम पर तत्काल पैसे भेजने को कहा जाए। पुलिस ने किसी भी संदिग्ध लिंक या फाइल को खोलने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने और वित्तीय लेनदेन के लिए अतिरिक्त verification रखने की अपील की है।