BHU के बिरला मैदान पर बड़ा सवाल...RTI में ‘कोई गतिविधि नहीं’, फिर मैदान में कैसे पहुंचे 150 बाहरी लोग?
Varanasi : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के बिरला मैदान में खेल गतिविधियों को लेकर आरटीआई में दिए गए जवाब और शुक्रवार को मैदान में दिखाई दी स्थिति के बीच कथित विरोधाभास सामने आया है। कला संकाय की ओर से आरटीआई के जवाब में कहा गया था कि बिरला मैदान में कोई खेल प्रशिक्षण गतिविधि संचालित नहीं हो रही है, जबकि आज मैदान में करीब 150 बाहरी लोग खेल गतिविधियों में दिखाई दिए।
इस स्थिति के बाद विश्वविद्यालय की संपत्ति के उपयोग, बाहरी लोगों को मैदान उपलब्ध कराने की अनुमति और संबंधित अभिलेखों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरटीआई में क्या दिया गया जवाब?
अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने 16 जुलाई 2026 को सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत बिरला मैदान में संचालित खेल प्रशिक्षण गतिविधियों के संबंध में जानकारी मांगी थी।
इसके जवाब में कला संकाय के अनुभाग अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी की ओर से 14 अगस्त 2026 को जारी पत्र में कहा गया कि कला संकाय की एथलेटिक समिति के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार बिरला मैदान में ऐसी कोई गतिविधि संचालित नहीं की जा रही है।

आज मैदान में करीब 150 बाहरी लोग दिखे
आरटीआई के जवाब के कुछ ही दिन बाद 21 अगस्त को बिरला मैदान में करीब 150 बाहरी लोगों के खेल गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आई है। यदि ये लोग विश्वविद्यालय के विद्यार्थी नहीं हैं, तो आरटीआई में दिए गए जवाब के बाद उनकी मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आधिकारिक अभिलेख में ऐसी गतिविधि संचालित नहीं होने की बात कही गई है, तो इन लोगों को मैदान का इस्तेमाल किस आधार पर मिला?
अनुमति और शुल्क को लेकर उठे सवाल
मामले में अब कई सवाल सामने आ रहे हैं—
- क्या बाहरी लोगों को मैदान में खेल गतिविधि की अनुमति दी गई थी?
- अनुमति किस अधिकारी या संस्था ने प्रदान की?
- क्या मैदान के उपयोग के लिए कोई शुल्क लिया गया?
- यदि शुल्क लिया गया तो उसकी रसीद और वित्तीय अभिलेख कहां हैं?
- मैदान कितनी अवधि के लिए उपलब्ध कराया गया?
- क्या इस गतिविधि की जानकारी कला संकाय की एथलेटिक समिति को थी?
- यदि जानकारी थी तो आरटीआई के जवाब में इसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
विश्वविद्यालय की संपत्ति के इस्तेमाल पर पारदर्शिता का सवाल
अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यदि बाहरी लोगों को बिरला मैदान के उपयोग की विधिवत अनुमति दी गई है, तो विश्वविद्यालय को संबंधित अनुमति-पत्र, नियम, शुल्क और अभिलेख उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई थी, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी संख्या में बाहरी लोग मैदान में किसकी अनुमति और जानकारी में खेल गतिविधियां कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मामला किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की संपत्ति के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। आरटीआई के आधिकारिक जवाब और मैदान की मौजूदा स्थिति के बीच दिखाई दे रहे अंतर की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
