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BHU में दो पक्षों के बीच मारपीट का मामला : पुलिस ने दर्ज की FIR, बोले DCP- पुरानी रंजिश...

 
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में यूजीसी द्वारा लाए गए नए कानून के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन अब हिंसक रूप लेता दिखाई दे रहा है। बुधवार को बीएचयू के राजाराम छात्रावास में दो छात्र गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई। घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।

सुनियोजित हमले का आरोप

इस मामले में पीड़ित छात्र आदर्श कुमार, जो बीएचयू में एमए प्रथम वर्ष (इतिहास) के छात्र हैं, ने लंका थाने में तहरीर दी है। आदर्श के अनुसार 3 फरवरी 2026 की शाम करीब 7 से 7:30 बजे के बीच राजाराम छात्रावास के मैस में पहले से घात लगाए बैठे कुछ छात्रों ने उन पर अचानक हमला कर दिया।

सिर पर जानलेवा हमला, मोबाइल भी छीना

तहरीर में आदर्श कुमार ने आरोप लगाया है कि अभय चतुर्वेदी (एमए द्वितीय वर्ष, समाजशास्त्र), आशु सिंह, अमित और अंकित सिंह (तीनों एमए द्वितीय वर्ष, राजनीति विज्ञान) समेत चार अज्ञात लोगों ने उनके सिर पर जानलेवा हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसके साथ ही आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया और दोबारा विश्वविद्यालय परिसर में दिखने पर जान से मारने की धमकी दी।

सोशल मीडिया पोस्ट बनी विवाद की वजह

पीड़ित छात्र का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी एक्ट के समर्थन में एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थी। इसी पोस्ट से नाराज होकर कुछ छात्रों ने उन पर हमला किया। आदर्श कुमार के मुताबिक, “हमने अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखी थी, लेकिन कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने हिंसा का सहारा लिया।”

दोनों पक्षों से मुकदमा दर्ज

घटना के बाद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और जमकर बहस हुई। पुलिस ने दूसरे पक्ष की ओर से अमित कुमार की तहरीर पर आदर्श कुमार, प्रभाकर, प्रेम और प्रत्युषा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। आदर्श ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने सुलह का सुझाव दिया था, लेकिन आत्मसम्मान का सवाल होने के कारण उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने का फैसला किया।

पुलिस और प्रशासन का बयान

डीसीपी काशी गौरव बसंवाल ने बताया कि दोनों पक्ष के छात्र ओबीसी वर्ग से हैं और प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इनके बीच पुरानी रंजिश थी, जिसके चलते मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले को जातिगत रंग देना पूरी तरह गलत है। दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई की गई है।

सुरक्षा कड़ी करने का भरोसा

वहीं, विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर ने कहा कि इस विवाद को गलत तरीके से जातिगत मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में बिना अनुमति रैलियां निकाली गईं, जो नियमों के खिलाफ हैं। राजाराम छात्रावास की घटना को लेकर दोनों पक्षों से बातचीत की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का माहौल बना रहे।