चंदौली NRHM घोटाले में बड़ा फैसला, पूर्व CMO समेत 3 दोषियों को 5-5 साल की सजा
चंदौली: बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले से जुड़े चंदौली के एक मामले में विशेष CBI अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने महिलाओं के परिवार नियोजन से जुड़े उपकरणों की खरीद में अनियमितता और फर्जीवाड़े के मामले में तत्कालीन CMO (परिवार कल्याण) डॉ. विभूति प्रसाद, उपभोक्ता सहकारी संघ के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल जायसवाल और दवा कारोबारी सुरेंद्र पांडेय को दोषी करार दिया है। तीनों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
यह मामला वर्ष 2008 से 2010 के बीच चंदौली में स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कॉपर-टी की खरीद से जुड़ा है। CBI जांच में खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, आपसी साठगांठ और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए थे।
21,694 कॉपर-टी की हुई थी खरीद
मामले के मुताबिक, वर्ष 2008 से 2010 के दौरान चंदौली के स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं को गर्भधारण से रोकने के लिए कुल 21,694 कॉपर-टी खरीदी थीं।
जांच में सामने आया कि विभाग में इतनी बड़ी संख्या में कॉपर-टी की वास्तविक आवश्यकता नहीं थी। इसके बावजूद खरीद की गई। CBI ने अपनी जांच में आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के मुताबिक पूरा नहीं किया गया और निजी आर्थिक लाभ तथा कमीशनखोरी के उद्देश्य से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
अधिकारियों और दवा कारोबारी की मिलीभगत का आरोप
CBI जांच के दौरान खरीद प्रक्रिया में तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारियों, उपभोक्ता सहकारी संघ के अधिकारी और दवा कारोबारी के बीच कथित साठगांठ की बात सामने आई।
जांच एजेंसी के अनुसार, कागजी कार्रवाई और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। इसी प्रक्रिया के जरिए कॉपर-टी की खरीद दिखाई गई, जबकि विभाग में उसकी इतनी जरूरत नहीं थी।
CBI ने जांच के बाद मामले में आरोप पत्र दाखिल किया और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब विशेष CBI अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
सरकारी खजाने को ₹8.22 लाख का नुकसान
कॉपर-टी की खरीद में हुई अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को करीब ₹8.22 लाख की राजस्व क्षति होने की बात CBI जांच में सामने आई थी।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि खरीद और सप्लाई की प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किया गया और इससे जुड़े लोगों ने कथित तौर पर आर्थिक लाभ हासिल किया।
कोर्ट के फैसले के बाद मामले में दोषी ठहराए गए तीनों आरोपितों को 5-5 साल के कठोर कारावास के साथ 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर CBI को मिली थी जांच
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी NRHM घोटाले की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर CBI को सौंपी गई थी। इसके बाद CBI ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में NRHM से जुड़े खर्च, खरीद और योजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की।
इसी जांच के दौरान चंदौली में महिलाओं के परिवार नियोजन से जुड़े उपकरणों की खरीद का यह मामला सामने आया था।
NRHM के तहत ग्रामीण और जरूरतमंद आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बड़ी मात्रा में धन उपलब्ध कराया गया था। इसी धन के इस्तेमाल में कई स्तरों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद यह मामला देश के चर्चित स्वास्थ्य घोटालों में शामिल हुआ।
लंबे समय बाद आया फैसला
चंदौली में कॉपर-टी खरीद से जुड़े इस मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चली। अब विशेष CBI अदालत के फैसले से मामले में तीनों आरोपितों की भूमिका पर अदालत का निर्णय सामने आया है।
कोर्ट ने तत्कालीन CMO (परिवार कल्याण) डॉ. विभूति प्रसाद, उपभोक्ता सहकारी संघ के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक अनिल जायसवाल और दवा कारोबारी सुरेंद्र पांडेय को दोषी मानते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
