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सिर्फ 100 रुपये में बन रहे थे फर्जी आधार-PAN, दिल्ली पुलिस ने ऐसे दबोचा साइबर गैंग

 
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अगर कोई वेबसाइट कुछ ही मिनटों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का दावा करती है, तो सतर्क हो जाइए। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने ऐसे ही एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर रैकेट का खुलासा किया है, जो ऑनलाइन पैसे लेकर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहा था।

पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह नकली सरकारी दस्तावेज तैयार कर उन्हें ऑनलाइन बेच रहा था। आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पहचान की चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता था।

सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से मिला सुराग

दिल्ली पुलिस को साइबर पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान bkprint.in नाम की एक वेबसाइट की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि वेबसाइट पर आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन से जुड़े दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित कई सरकारी दस्तावेज तैयार करने का दावा किया जा रहा था।

सूचना मिलने के बाद पुलिस ने वेबसाइट की गतिविधियों की गहन जांच शुरू की।

पुलिस ने ग्राहक बनकर किया खुलासा

वेबसाइट की सच्चाई जानने के लिए पुलिस अधिकारियों ने खुद एक डमी यूजर अकाउंट बनाया। जांच के तहत वेबसाइट पर दिए गए यूपीआई के माध्यम से 100 रुपये जमा किए गए। इसके बाद नकली नाम, पता और फोटो अपलोड कर आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाने का अनुरोध किया गया।

जांच के दौरान पुलिस को पुष्टि हुई कि वेबसाइट फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर ग्राहकों को उपलब्ध करा रही थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

साइबर अपराध में हो सकता था इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार, ऐसे फर्जी दस्तावेज पहचान की चोरी, बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी सिम कार्ड लेने और अन्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए जा सकते थे। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं।

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी दस्तावेज बनवाने के ऐसे दावों पर भरोसा न करें और केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से ही दस्तावेज बनवाएं।