टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली पुलिस बनकर ठगों ने किया डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर 70 लाख की ठगी
Digital Arrest Scam Jaunpur: साइबर अपराधियों ने टेलीकम्युनिकेशन विभाग और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर मुंगराबादशाहपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर जालसाजों ने पीड़ित से करीब 70 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पीड़ित शिवमूर्ति सिंह वर्तमान में सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक कंपनी परिसर में रहते हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 8 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकम्युनिकेशन विभाग का अधिकारी बताया।
आधार कार्ड से सिम और करोड़ों के लेन-देन का लगाया आरोप
कथित अधिकारी ने पीड़ित से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर दिल्ली में एक सिम कार्ड जारी कराया गया है। इसी सिम के माध्यम से बैंक खाता खोला गया और उस खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। इस जानकारी के बाद पीड़ित को कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसने का डर दिखाया गया।
इसके बाद साइबर अपराधियों ने मामले को गंभीर बनाने के लिए दिल्ली पुलिस का फर्जी नोटिस भेजा। कुछ समय बाद वर्दी पहने एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित से पूछताछ की। इस दौरान उसे लगातार निगरानी में होने और किसी से संपर्क करने पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर अलग-अलग खातों में जमा कराई रकम
आरोपियों ने पीड़ित पर लगातार दबाव बनाए रखा। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उसे जांच में सहयोग करने और अपनी रकम की जांच कराने का झांसा दिया गया। गिरफ्तारी का भय दिखाकर साइबर अपराधियों ने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई।
इस तरह अलग-अलग लेन-देन के जरिए पीड़ित से करीब 70 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की।
साइबर अपराध पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
साइबर सेल प्रभारी देवानंद रजक ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है और ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा अन्य माध्यमों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए लेन-देन से जुड़े विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
