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Facebook पर हुई दोस्ती पड़ी भारी! मार्केटिंग अफसर से क्रिप्टो निवेश के नाम पर 2.60 करोड़ की ठगी

 
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आगरा। साइबर अपराधियों ने फेसबुक पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर खाद्य एवं रसद विभाग के एक विपणन अधिकारी को अपने जाल में फंसा लिया और क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर उनसे करीब 2.60 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। करीब आठ महीने तक अलग-अलग बहानों से रकम ट्रांसफर कराने के बाद आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, देवरी रोड स्थित मुन्ना पैलेस कॉलोनी निवासी अगम तेज प्रकाश खाद्य एवं रसद विभाग में विपणन अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 9 अगस्त 2025 को फेसबुक पर "निधि शर्मा" नाम की एक आईडी से उन्हें मैसेज प्राप्त हुआ था। महिला ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताते हुए बातचीत शुरू की।

धीरे-धीरे फेसबुक मैसेंजर से शुरू हुई बातचीत व्हाट्सएप तक पहुंच गई और दोनों के बीच विश्वास का रिश्ता बन गया। इसी दौरान महिला ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया।

शुरुआती मुनाफे से जीता भरोसा

आरोपियों ने पीड़ित को क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग से जुड़े बाउचर और दस्तावेज दिखाकर भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्हें "ट्रस्ट कॉइन ट्रेडिंग" नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जहां निवेश और ट्रेडिंग की प्रक्रिया शुरू कराई गई।

शुरुआत में कुछ लाभ दिखाकर उनका विश्वास मजबूत किया गया। इसके बाद निवेश की रकम लगातार बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। जब अधिकारी ने अपनी राशि निकालने की कोशिश की तो तकनीकी दिक्कतों, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर बार-बार अतिरिक्त रकम जमा कराई जाती रही।

युवती का पिता बनकर भी किया संपर्क

पीड़ित ने बताया कि बाद में एक व्यक्ति ने खुद को युवती का पिता बताते हुए उनसे संपर्क किया। उसने एक अन्य व्यक्ति आलोक के माध्यम से निवेश की रकम निकलवाने का भरोसा दिलाया। आलोक ने कमीशन तय करते हुए करीब 1.42 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया, लेकिन रकम निकालने के लिए पहले कमीशन जमा करने की शर्त रख दी।

आरोपियों के झांसे में आकर अगम तेज प्रकाश ने विभिन्न बैंक खातों, यूपीआई आईडी और क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस पर करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने खुद को सेबी (SEBI) से पंजीकृत संस्था का प्रतिनिधि बताकर भी उनका विश्वास जीता।

साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

जब लगातार रकम जमा कराने के बावजूद पैसा वापस नहीं मिला और आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया, तब अधिकारी को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो वॉलेट की जांच शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से आरोपियों की पहचान करने और रकम की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर किसी भी प्रकार के निवेश से बचें और निवेश करने से पहले संबंधित संस्था की वैधता की पूरी जांच अवश्य करें।