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फर्जी Zepto फ्रेंचाइजी बनाकर लोगों को लगाते थे चूना, साइबर गैंग पर गैंगस्टर केस दर्ज

वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में Zepto कंपनी के नाम पर फर्जी फ्रेंचाइजी बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है। गिरोह के दो मुख्य आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज और नकदी भी बरामद की है।

 
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वाराणसी: रोहनिया पुलिस ने जेप्टो कंपनी के नाम पर फर्जी फ्रेंचाइजी और रजिस्ट्रेशन बनाकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह के दो मुख्य आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दोनों आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ऑनलाइन फ्रेंचाइजी और रजिस्ट्रेशन के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर ठगी करता था। मामले की जांच साइबर क्राइम थाना और रोहनिया पुलिस की संयुक्त टीम कर रही है।

बिहार और झारखंड से जुड़े हैं आरोपी

थाना प्रभारी निरीक्षक राजू सिंह ने बताया कि गिरोह का सरगना विकास कुमार है, जो बिहार के नवादा जिले के लाल बिगहा इलाके का रहने वाला है। वहीं दूसरा आरोपी शान्तनु कुमार झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा बंगालीटोला का निवासी है। उसका मूल निवास भी बिहार के नवादा जिले में बताया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी मिलकर संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।

गैंगस्टर एक्ट में दर्ज हुआ मुकदमा

रोहनिया पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत गैंगस्टर एक्ट में केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से साइबर अपराध में सक्रिय था और लोगों को ऑनलाइन निवेश तथा फ्रेंचाइजी के नाम पर फंसाता था।

छापेमारी में भारी मात्रा में सामान बरामद

पुलिस ने बताया कि 23 अक्टूबर 2025 को शान्तनु कुमार के कब्जे से 6 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 2 कीपैड फोन, 3 सिम कार्ड, 2 लैपटॉप, 2 वाईफाई राउटर और 25,300 रुपये नकद बरामद किए गए थे।

इसके बाद 25 अक्टूबर 2025 को विकास कुमार के पास से 5 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, Zepto फ्रेंचाइजी से जुड़े 4 फर्जी दस्तावेज और 29,200 रुपये नकद बरामद किए गए।

साइबर ठगी नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस अब इस पूरे साइबर नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साइबर क्राइम टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई।