गाजीपुर: ₹500 में हाथ-पैर तोड़ने की सुपारी, WhatsApp पर मर्डर की प्लानिंग, कटरा गैंग का नेटवर्क बेनकाब
गाजीपुर I उत्तर प्रदेश में अपराध का नया चेहरा सामने आया है। अब हत्या, रंगदारी, मारपीट और गैंगवार की साजिशें किसी सुनसान ठिकाने पर नहीं, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुपों में रची जा रही हैं। गाजीपुर में होटल कारोबारी के बेटे विनीत राय की हत्या ने इस खतरनाक ट्रेंड को उजागर कर दिया है।
29 मई की रात गाजीपुर में होटल व्यवसायी आलोक राय के बेटे विनीत राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि हत्या की पूरी साजिश व्हाट्सएप ग्रुप ‘कटरा गैंग’ पर रची गई थी। किसे मारना है, कितनी गोलियां चलानी हैं और कौन सा हथियार इस्तेमाल करना है, इसकी पूरी प्लानिंग पहले से तय थी।
बताया जा रहा है कि दो बाइकों पर सवार चार नकाबपोश बदमाश होटल पहुंचे और विनीत राय पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। उन्हें चार गोलियां लगीं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले में मुख्य आरोपी शंकर पांडेय समेत चार बदमाश फरार हैं। शंकर खुद को सोशल मीडिया पर ‘किंग ऑफ गाजीपुर’ और ‘बाहुबली’ बताता था।
मृतक के पिता आलोक राय का आरोप है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहा था। होटल में कई बार तोड़फोड़ भी की गई थी। जांच में सामने आया कि शंकर पांडेय ने ‘कटरा गैंग’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें उसके सभी आपराधिक साथी जुड़े हुए थे।
गाजीपुर का यह मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। बलिया में ‘221715 गैंग’ नाम से सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप में 500 रुपये लेकर लोगों के हाथ-पैर तोड़ने की बातें होती थीं। धीरे-धीरे इस गैंग में 70 से अधिक युवक शामिल हो गए और कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया गया। दिसंबर 2025 में गैंगवार के चलते एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
वहीं गोरखपुर और महराजगंज में ‘AK-47 गैंग’ और ‘रेड गैंग’ के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप सक्रिय थे। इन ग्रुपों के जरिए युवकों को इकट्ठा कर मारपीट, धमकी और गैंगवार जैसी घटनाएं अंजाम दी जाती थीं। एक बड़े गैंगवार के बाद पुलिस ने 28 बदमाशों को गिरफ्तार किया था, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे।
गोरखपुर में ‘महाकाल’ और ‘गुंडा’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप भी चर्चा में रहे। इन ग्रुपों से जुड़े 18 से 22 वर्ष के युवक लूट, मारपीट और हत्या जैसी घटनाओं में शामिल पाए गए। पुलिस कार्रवाई के बाद कई आरोपी जेल गए, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद फिर से सक्रिय होने की कोशिश करते रहे।
कन्नौज में ‘बिच्छू गैंग’ और औरैया में ‘बॉस गैंग’ जैसे समूह भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर अपराध का नेटवर्क तैयार कर चुके हैं। इन गैंगों के सदस्य हथियारों के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे और इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश करते थे।
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का कहना है कि व्हाट्सएप केवल एक माध्यम है, असली चिंता उन युवाओं की है जो खुद को ‘माफिया’, ‘बाहुबली’ और ‘गैंगस्टर’ साबित करने के लिए अपराध का रास्ता चुन रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिलने वाली लोकप्रियता और डर का माहौल बनाने की मानसिकता उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. कृष्णा मिश्रा के अनुसार, कम उम्र के युवाओं में अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे पारिवारिक माहौल, गलत संगत, नशे की लत और सोशल मीडिया पर दबंग छवि बनाने की चाह प्रमुख कारण हैं। कई बार युवा दिखावे और प्रभाव जमाने के लिए ऐसे गैंगों का हिस्सा बन जाते हैं और धीरे-धीरे गंभीर अपराधों में शामिल हो जाते हैं।
गाजीपुर हत्याकांड ने यह साफ कर दिया है कि अपराध की दुनिया अब डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है। व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए संगठित हो रहे ये गैंग कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनकर उभरे हैं। पुलिस के सामने अब सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे इस अपराधी नेटवर्क को तोड़ने की भी बड़ी जिम्मेदारी है।
