साइबर ठगों का नया खेल: पहले मुनाफा दिखाया, फिर 17 लाख ठगे, फर्जी बैंक ऐप से उड़ाए 6.31 लाख
वाराणसी में साइबर ठगों ने दो अलग-अलग मामलों में 23 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। टेलीग्राम पर शेयर बाजार में निवेश के नाम पर युवक से 17.12 लाख रुपये ऐंठे गए, जबकि फर्जी बैंक प्रोफाइल और नकली ऐप के जरिए दूसरे युवक के क्रेडिट कार्ड से 6.31 लाख रुपये निकाल लिए गए।
वाराणसी: साइबर अपराधियों ने वाराणसी में एक बार फिर लोगों को निवेश और बैंकिंग सेवाओं के नाम पर निशाना बनाया है। अलग-अलग दो मामलों में साइबर ठगों ने 23 लाख रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। एक युवक को टेलीग्राम पर शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देकर 17.12 लाख रुपये हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में व्हाट्सएप पर फर्जी बैंक अधिकारी बनकर नकली ऐप इंस्टॉल कराया गया और क्रेडिट कार्ड से 6.31 लाख रुपये निकाल लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
टेलीग्राम पर 'ब्लॉक ट्रेडिंग' का झांसा, 17.12 लाख की ठगी
कैंट थाना क्षेत्र के सिकरौल निवासी कपिल देव राजभर ने साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उनसे टेलीग्राम पर 'नताली' नाम की प्रोफाइल के जरिए संपर्क किया गया। इसके बाद उन्हें एक टेलीग्राम चैनल से जोड़कर खुद को 'नालंदा कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड' का प्रतिनिधि बताया गया।
ठगों ने दावा किया कि 'ब्लॉक ट्रेडिंग' के जरिए कम समय में बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। भरोसा जीतने के लिए सबसे पहले 21 और 25 मार्च को उनसे 5,000 और 10,000 रुपये का निवेश कराया गया। इसके बाद 8 अप्रैल को उनके खाते में 15,000 रुपये मुनाफे के रूप में भेज दिए गए।
यही शुरुआती भुगतान ठगी का सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। मुनाफा मिलने के बाद कपिल देव का भरोसा पूरी तरह जीत लिया गया और फिर अलग-अलग तारीखों में लगातार बड़ी रकम निवेश कराने का सिलसिला शुरू हो गया।
अलग-अलग किस्तों में वसूले लाखों रुपये
शिकायत के अनुसार 9 अप्रैल को यूपीआई के जरिए 92 हजार रुपये, 16 अप्रैल को 5.55 लाख रुपये और मई महीने में अलग-अलग तिथियों पर 50 हजार रुपये, 5 लाख रुपये तथा दोबारा 5 लाख रुपये जमा कराए गए। इस तरह कुल 17 लाख 12 हजार रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
जब पीड़ित ने निवेश की गई राशि और मुनाफे को अपने डीमैट खाते में ट्रांसफर करने की बात कही तो ठगों ने नया बहाना बनाते हुए 25.48 लाख रुपये अतिरिक्त जमा करने की मांग कर दी। साथ ही धमकी दी कि यदि यह रकम जमा नहीं की गई तो पूरा निवेश फ्रीज कर दिया जाएगा।
बैंक की सूचना से खुला ठगी का राज
6 जून को भारतीय स्टेट बैंक ने कपिल देव को जानकारी दी कि उनके खाते में आए 15 हजार रुपये साइबर पुलिस द्वारा होल्ड कर दिए गए हैं। जांच में पता चला कि यह कार्रवाई पटना साइबर पुलिस ने की थी।
बाद में सामने आया कि ठगों ने जो शुरुआती 15 हजार रुपये मुनाफे के रूप में भेजे थे, वह भी किसी अन्य साइबर अपराध से जुड़े ठगी के पैसे थे। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर) विदुष सक्सेना ने बताया कि इस्तेमाल की गई डिजिटल आईडी और बैंक खातों को ट्रैक किया जा रहा है।
फर्जी बैंक प्रोफाइल और नकली ऐप से 6.31 लाख की ठगी
दूसरा मामला शिवपुर थाना क्षेत्र का है, जहां विनय कुमार झा को व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से संदेश मिला। ठग ने अपनी प्रोफाइल पर बैंक का लोगो लगाकर खुद को बैंक प्रतिनिधि बताया और आरबीएल बैंक तथा आईडीएफसी बैंक के नाम पर कुछ एप फाइलें डाउनलोड कराईं।
जैसे ही पीड़ित ने उन ऐप्स को इंस्टॉल किया, उनके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच गई। विनय कुमार का कहना है कि उन्होंने किसी को भी ओटीपी, सीवीवी, पिन या पासवर्ड साझा नहीं किया था।
चार ट्रांजैक्शन में उड़ाए 6.31 लाख रुपये
फर्जी ऐप इंस्टॉल होने के बाद साइबर ठगों ने भारतीय स्टेट बैंक और आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हुए चार अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए और कुल 6 लाख 31 हजार रुपये निकाल लिए। इसके अलावा 36 हजार रुपये का एक और ट्रांजैक्शन करने की कोशिश की गई, जो असफल रही। 29 जून को पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के साथ शिवपुर थाने की साइबर हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिवपुर थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा ने बताया कि दोनों मामलों की जांच साइबर विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है। डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शेयर बाजार में निवेश, त्वरित मुनाफे या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े किसी भी संदेश पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी निवेश से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच करें और व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मिले लिंक, ऐप या भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन करने से पहले आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूर करें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
