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महाराष्ट्र पुलिस बनकर रिटायर्ड प्रिंसिपल को किया डिजिटल अरेस्ट, 3 लाख ठगे

वाराणसी में ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य को डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाया और तीन लाख रुपये ठग लिए। ठग और पैसे की मांग कर रहे थे, लेकिन बैंक कर्मचारी की सतर्कता से 10 लाख रुपये की बड़ी ठगी होने से बच गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

 
डिजिटल अरेस्ट
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वाराणसी: लंका थाना क्षेत्र के बालाजी नगर कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शंकर सिंह यादव साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें “डिजिटल गिरफ्तारी” का डर दिखाया और तीन लाख रुपये ठग लिए। हालांकि बैंक कर्मचारी की सतर्कता से आगे की बड़ी ठगी होने से बच गई।

पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन

पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियां हो रही हैं।

वीडियो कॉल से बढ़ाया दबाव

फोन के बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया। उसने मामले को गंभीर बताते हुए “डिजिटल गिरफ्तारी” का डर दिखाया और कहा कि यदि कार्रवाई से बचना है तो 50 लाख रुपये देने होंगे।

डर के कारण ट्रांसफर किए रुपये

ठगों के दबाव और डर में आकर शंकर सिंह यादव ने तीन लाख रुपये अलग-अलग खातों में भेज दिए। इसके बाद भी ठग लगातार अधिक पैसे की मांग करते रहे और उन्हें बैंक से कर्ज लेने के लिए दबाव डालते रहे।

बैंक कर्मी की सतर्कता से बची बड़ी रकम

ठगों के कहने पर पीड़ित बैंक पहुंचे और 10 लाख रुपये का व्यक्तिगत कर्ज भी स्वीकृत करा लिया। इसी दौरान उनकी घबराहट देखकर बैंक के उप प्रबंधक आनंद प्रकाश सिंह को संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत भुगतान रोक दिया और पीड़ित को समझाया कि यह ठगी हो सकती है। इसके बाद उन्होंने परिजनों को सूचना दी, जिससे समय रहते बड़ी रकम बच गई।

थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और साइबर प्रकोष्ठ की मदद से ठगों की पहचान की कोशिश की जा रही है।