वाराणसी: फर्जी ईमेल भेजकर बिल्डर के खाते से उड़ाए 54.91 लाख, साइबर टीम ने 48 लाख रुपये कराए होल्ड
वाराणसी: बीएचयू स्थित एसबीआई शाखा में फर्जी ईमेल भेजकर साइबर ठगों ने एक बिल्डर के बैंक खाते से 54 लाख 91 हजार 810 रुपये तीन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही बिल्डर बैंक पहुंचा और आपत्ति जताई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने पुलिस से संपर्क किया। साइबर टीम ने तेजी दिखाते हुए 48 लाख रुपये होल्ड करा लिए।
पहले फोन कर एफडी की ब्याज दर पूछी, फिर रची ठगी की साजिश
एसबीआई की बीएचयू शाखा के मुख्य प्रबंधक रविश ठाकुर ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि एक सितंबर की दोपहर बैंक में फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को बिल्डर रमेश (काल्पनिक नाम) बताया। उसने शाखा प्रबंधक से टर्म डिपॉजिट यानी एफडी की ब्याज दरों के बारे में जानकारी ली।
बताया गया कि इसके बाद शाम को उसी व्यक्ति ने दोबारा फोन किया। उसने शाखा प्रबंधक से कहा कि खाते से रकम ट्रांसफर करने के लिए उसने ई-मेल भेजा है। उसने दावा किया कि चेकबुक खत्म हो गई है और वह कुछ ही मिनट में बैंक पहुंचकर आरटीजीएस वाउचर पर हस्ताक्षर कर देगा।
जल्दबाजी में रकम ट्रांसफर करने का बनाया दबाव
आरोप है कि फोन करने वाले ने बैंककर्मियों पर तत्काल रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। इसी दौरान बैंक को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसके आधार पर खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई।
रकम को तीन अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया। अब्दुल के खाते में 28,20,801 रुपये, मो. आरिफ के खाते में 17,15,109 रुपये और धीरज कुमार के खाते में 9,55,900 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 54,91,810 रुपये खाते से निकल गए।
बिल्डर के पहुंचते ही खुला मामला
खाते से रकम डेबिट होने की जानकारी मिलने के बाद बिल्डर बैंक पहुंचा और लेनदेन पर आपत्ति जताई। इसके बाद बैंक अधिकारियों को साइबर ठगी का शक हुआ। शाखा के मुख्य प्रबंधक रविश ठाकुर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामला सामने आते ही साइबर पुलिस टीम सक्रिय हुई और ट्रांसफर की गई रकम को ट्रेस करने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस के मुताबिक, टीम ने समय रहते 48 लाख रुपये होल्ड करा दिए हैं, जिससे ठगी की बड़ी रकम बचाने में सफलता मिली।
साइबर टीम आरोपितों की तलाश में जुटी
अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम नृपेंद्र ने बताया कि पुलिस की सक्रियता से बड़ी धनराशि बचा ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल आरोपितों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई चल रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी ईमेल कैसे तैयार किया गया, ठगों को बिल्डर के बैंक खाते और लेनदेन से जुड़ी जानकारी कैसे मिली और इस वारदात में कितने लोग शामिल हैं।
