वाराणसी के 500 'म्यूल अकाउंट' से देशभर में करोड़ों की साइबर ठगी, टेलीग्राम से बनता था नेटवर्क
वाराणसी साइबर सेल ने ऑपरेशन म्यूल के तहत 500 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है। जांच में सामने आया कि खाताधारकों ने 5 से 7 हजार रुपये या कमीशन के बदले अपने खाते साइबर ठगों को किराये पर दिए। कई राज्यों की करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से इन खातों का लिंक मिला है।
वाराणसी: साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच वाराणसी साइबर सेल ने बैंक खातों को किराये पर देकर साइबर ठगी कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान ऐसे 500 म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनके जरिए देश के अलग अलग राज्यों में हुई करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया गया। जांच एजेंसियां अब इन सभी खातों की गहन पड़ताल में जुटी हैं।
साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि अधिकांश संदिग्ध खाते निजी बैंकों में खोले गए हैं और करीब 80 प्रतिशत खाताधारक निम्न आय वर्ग या युवा हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि कई लोगों ने अपने बैंक खाते 5,000 से 7,000 रुपये मासिक किराये या एक से दो प्रतिशत कमीशन के लालच में साइबर गिरोहों को सौंप दिए। इतना ही नहीं, खाताधारकों ने इंटरनेट बैंकिंग की यूजर आईडी, पासवर्ड, मोबाइल बैंकिंग एक्सेस, एटीएम कार्ड और पासबुक तक ठगों को उपलब्ध करा दी।
टेलीग्राम और सोशल मीडिया से तैयार किया गया नेटवर्क
साइबर सेल के अनुसार, ठगों ने टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे लोगों से संपर्क किया, जिन्हें आसानी से पैसों का लालच देकर अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जा सके। इन खातों में केरल, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और नोएडा समेत कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की गई। अब उन बैंक खातों की भी निगरानी की जा रही है, जिनमें अचानक लेनदेन बढ़ा है या कम समय में बड़ी रकम जमा और निकासी हुई है।
हर महीने 1200 तक पहुंच रहीं साइबर ठगी की शिकायतें
वाराणसी और आसपास के जिलों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर सेल के मुताबिक, हर दिन औसतन 30 और हर महीने 1100 से 1200 शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज हो रही हैं। इन्हीं शिकायतों के विश्लेषण के दौरान 500 संदिग्ध बैंक खाते साइबर सेल के रडार पर आए।
दो माह पहले भी हुआ था ढाई करोड़ रुपये के नेटवर्क का खुलासा
करीब दो महीने पहले साइबर सेल ने सिगरा, भेलूपुर, चेतगंज और चोलापुर क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए बैंक खाते किराये पर देने वाले कई लोगों को पकड़ा था। जांच में उन खातों से करीब 2.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ था।
जांच में बजरडीहा निवासी मोहम्मद उनैश के खाते से 43 शिकायतों के आधार पर 2.19 करोड़ रुपये, रोहनिया निवासी अजीत के खाते से 22 लाख रुपये, नक्खीघाट निवासी आरिफ जमाल के खाते से 1.08 लाख रुपये, चोलापुर निवासी आशीष के खाते से 12,301 रुपये तथा सत्यम के खाते से 41 हजार रुपये के साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन सामने आए थे।
एसीपी बोले- बैंक भी रखें संदिग्ध खातों पर नजर
एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि ऑपरेशन म्यूल के पहले चरण में 10 संदिग्ध बैंक खाते मिले थे, जिनमें से छह को सीज कर दिया गया था। जांच आगे बढ़ने पर अब 500 खाते रडार पर आए हैं और उनकी जांच जारी है।
उन्होंने कहा कि बैंकों को भी साइबर सेल के साथ संदिग्ध खातों की जानकारी साझा करनी चाहिए और नए खातों में होने वाले असामान्य लेनदेन पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए, ताकि साइबर अपराधों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके।
दो लोगों से 12.31 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी
इसी बीच साइबर ठगों ने दो अलग-अलग मामलों में लोगों को निशाना बनाते हुए 12.31 लाख रुपये की ठगी कर ली। दोनों मामलों में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पहले मामले में शिवपुर थाना क्षेत्र के भगवानपुर निवासी विनय कुमार झा को 24 जून को खुद को आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग का कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने फोन किया। कार्ड अपडेट कराने के बहाने व्हाट्सएप पर एपीके फाइल इंस्टॉल कराई गई। इसके बाद उनके आरबीएल बैंक के क्रेडिट कार्ड से 2,37,357 रुपये और एसबीआई के क्रेडिट कार्ड से 3,93,911 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
दूसरे मामले में रोहनिया के अवलेशपुर स्थित आदर्श विहार निवासी सुनेना तिवारी को पेंशन कार्ड बनवाने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करते ही उनके बैंक खाते से तीन ट्रांजैक्शन में छह लाख रुपये निकाल लिए गए। दो दिन बाद ठग ने खुद को इंडसइंड बैंक, मुंबई का अधिकारी बताकर दोबारा संपर्क भी किया। मामले की जांच साइबर थाना कर रहा है।
साइबर सेल की अपील
साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग आईडी या पासवर्ड उपलब्ध न कराएं। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मोबाइल एप पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
