केसरिया पगड़ी से लेकर लाल जोधपुरी बंधेज तक...हर स्वतंत्रता दिवस बदला PM मोदी का परिधान, जानिए इस बार क्या रहा खास
लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री का संबोधन जितना चर्चा में रहता है, उतना ही उनके पहनावे और खास तौर पर उनकी पगड़ी भी सुर्खियां बटोरती है। पीएम मोदी हर साल स्वतंत्रता दिवस पर अलग अंदाज की पगड़ी पहनते हैं और इसके जरिए देश की विविध संस्कृति, परंपरा और स्थानीय कारीगरों को सम्मान देने का संदेश देते नजर आते हैं।
इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक लाल रंग की टाई एंड डाई यानी बंधेज पगड़ी पहनी। सफेद कुर्ते और चॉकलेट ब्राउन वेस्ट के साथ उनकी यह पगड़ी बेहद खास नजर आई। जैकेट पर लगा केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा पॉकेट स्क्वायर उनके पूरे लुक में देशभक्ति का रंग भी जोड़ रहा था।
बंधेज पगड़ी की खासियत क्या है?
बंधेज भारत की पारंपरिक टाई एंड डाई हस्तकला है। इसे तैयार करने के लिए कपड़े के छोटे-छोटे हिस्सों को धागों से बांधा जाता है और फिर उसे अलग-अलग रंगों में रंगा जाता है। धागे खोलने के बाद कपड़े पर आकर्षक पैटर्न उभरकर सामने आते हैं।

राजस्थान और गुजरात में बंधेज और बांधनी का विशेष सांस्कृतिक महत्व है। खास मौकों और समारोहों में इस तरह की पगड़ियां पहनने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इसलिए प्रधानमंत्री की बंधेज पगड़ी केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक हस्तकला को सम्मान देने का माध्यम भी मानी जा सकती है।
बंधेज का लाल रंग उत्सव, गौरव और सम्मान से भी जुड़ा माना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह पहनावा देश के स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक कला को बढ़ावा देने वाले ‘वोकल फॉर लोकल’ संदेश से भी जुड़ता है।
हर साल अलग अंदाज में दिखी पीएम मोदी की पगड़ी
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी पिछले कई वर्षों से आकर्षण का केंद्र रही है। 2025 में उन्होंने केसरिया पगड़ी, भगवा जैकेट और तिरंगा बॉर्डर वाले गमछे का इस्तेमाल किया था। 2024 में सफेद कुर्ते के साथ राजस्थानी लहरिया पगड़ी में नजर आए थे।
2023 में उन्होंने पीले, हरे और लाल रंगों वाली बांधनी प्रिंट पगड़ी पहनी थी। 2022 में नेहरू जैकेट के साथ लाल मोटिफ और लहराती पूंछ वाली केसरिया-तिरंगा पगड़ी उनके लुक का हिस्सा रही। 2021 में क्रीम और केसरिया रंग की पगड़ी के साथ लाल बॉर्डर वाला दुपट्टा नजर आया।
2020 में कोरोना महामारी के बीच उन्होंने केसरिया और क्रीम रंग की पगड़ी पहनी और केसरिया बॉर्डर वाले स्कार्फ से चेहरे को ढका था। 2019 में लाल-ऑरेंज पगड़ी और 2018 में केसरिया-लाल साफा उनके स्वतंत्रता दिवस के पहनावे का हिस्सा रहा।
इससे पहले 2015 में बादामी कुर्ते और नेहरू जैकेट के साथ लाल-हरी और पीली क्रिस-क्रॉस डिजाइन वाली पगड़ी, 2016 में गुलाबी-पीली टाई एंड डाई पगड़ी और 2017 में हाफ स्लीव पीले कुर्ते के साथ लाल-पीली पगड़ी ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
भाषण की अवधि भी रही चर्चा में
इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 76 मिनट तक देश को संबोधित किया। यह उनके पिछले 13 स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में तीसरा सबसे छोटा भाषण बताया गया।
2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने 83 मिनट का भाषण देकर लाल किले से सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषण का रिकॉर्ड बनाया था। इससे पहले यह रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने 1947 में करीब 72 मिनट तक देश को संबोधित किया था। 1997 में प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल ने करीब 71 मिनट का भाषण दिया था।
वहीं, स्वतंत्रता दिवस पर सबसे छोटे भाषणों में जवाहरलाल नेहरू का 1954 और इंदिरा गांधी का 1966 में दिया गया 14-14 मिनट का संबोधन शामिल है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2012 और 2013 में क्रमशः 32 और 35 मिनट तक भाषण दिया था, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 और 2003 में 25 और 30 मिनट तक देश को संबोधित किया था।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी केवल उनके पहनावे का हिस्सा नहीं होती। इसके जरिए वे अक्सर भारत की अलग-अलग लोक परंपराओं, क्षेत्रीय संस्कृति और हस्तशिल्प को मंच देते नजर आते हैं। इस बार लाल रंग की बंधेज पगड़ी के जरिए भी स्थानीय कला, भारतीय विरासत और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश साफ दिखाई दिया।
