हाईवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और डेटा सेंटर... आखिर कैसे 'कंस्ट्रक्शन सुपरपावर’ बन रहा है भारत? अमेरिका को भी छोड़ा पीछे!
भारत ने निर्माण क्षेत्र की वृद्धि में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। Foundamental की रिपोर्ट के अनुसार 2020-2030 के बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Construction Growth Market बनेगा। जानिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और ऊर्जा क्षेत्र कैसे बदल रहे हैं भारत की तस्वीर।
India Construction Growth: पिछले कुछ वर्षों में यदि आपने भारत के किसी भी बड़े शहर या राज्य की यात्रा की है तो शायद आपने एक बात जरूर महसूस की होगी—हर तरफ निर्माण कार्य जारी है। कहीं एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, कहीं नए एयरपोर्ट तैयार हो रहे हैं, तो कहीं मेट्रो और रेलवे परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अब यह सिर्फ एक महसूस होने वाली बात नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि कर रही है।
जर्मनी की बर्लिन स्थित वेंचर कैपिटल फर्म Foundamental की ताजा रिपोर्ट State of the Project Economy 2026 के अनुसार भारत ने निर्माण क्षेत्र (Construction Growth) में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है और अब चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 से 2030 के बीच वैश्विक निर्माण वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी 14.1% रहने का अनुमान है, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी 11.1% होगी। इस सूची में चीन अब भी 26.1% हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है।
इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की सबसे बड़ी ताकत
भारत की इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने सड़क, रेल, एयरपोर्ट, मेट्रो, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर बड़े स्तर पर निवेश किया है। इन परियोजनाओं ने न केवल रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति दी है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार इस दशक के अंत तक औसतन 8% वार्षिक दर से बढ़ सकता है, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। Foundamental के को-फाउंडर और जनरल पार्टनर शुभांकर भट्टाचार्य के अनुसार, निर्माण वृद्धि के मामले में भारत अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल हो चुका है।
तेजी से बढ़ते शहर बढ़ा रहे निर्माण की मांग
भारत की शहरी आबादी लगातार बढ़ रही है। हर साल लाखों लोग रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश में गांवों से शहरों की ओर आ रहे हैं। इससे आवास, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, पानी, सीवर, अस्पताल और व्यावसायिक भवनों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में शहरीकरण भारत के निर्माण क्षेत्र की सबसे बड़ी विकास कहानी बना रहेगा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से मिल रही नई रफ्तार
‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं ने देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ऊर्जा दी है। नई फैक्ट्रियां स्थापित होने के साथ-साथ औद्योगिक पार्क, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स हब, बिजली नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ रही है। यही कारण है कि औद्योगिक निवेश सीधे तौर पर निर्माण क्षेत्र को मजबूती दे रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में निर्माण वृद्धि अब केवल सामान्य विकास खर्च पर आधारित नहीं है, बल्कि बड़े और समयबद्ध प्रोजेक्ट्स इसकी प्रमुख ताकत बन रहे हैं।
डेटा सेंटर क्रांति से खुल रहे नए अवसर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने डेटा सेंटर निर्माण को तेजी से बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर निर्माण बाजार 2018 के मुकाबले लगभग दोगुना हो जाएगा। भारत में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं, क्लाउड स्टोरेज और डेटा लोकलाइजेशन नीतियों के कारण डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा फायदा निर्माण क्षेत्र को मिल रहा है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर निर्माण भारत के सबसे तेजी से बढ़ते निर्माण क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स होंगे अगले बड़े ग्रोथ इंजन
भारत की निर्माण कहानी केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और आधुनिक लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर निर्माण उद्योग की अगली बड़ी विकास शक्ति बन सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है भारत की यह उपलब्धि?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल निर्माण क्षेत्र की सफलता नहीं है, बल्कि वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत भी है। आज दुनिया का बड़ा निवेश एशिया की ओर बढ़ रहा है और भारत इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन मिलकर 2020 से 2030 के बीच वैश्विक निर्माण वृद्धि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा योगदान देंगे। यह दुनिया की आर्थिक शक्ति के एशिया की ओर शिफ्ट होने का स्पष्ट संकेत है।
भारत की नई पहचान: सिर्फ आईटी नहीं, निर्माण महाशक्ति भी
कई वर्षों तक भारत की पहचान आईटी सेवाओं, स्टार्टअप्स और उपभोक्ता बाजार के रूप में रही। लेकिन अब एक नई कहानी सामने आ रही है। देश तेजी से हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर, डेटा सेंटर और ऊर्जा परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। यही वजह है कि भारत आज निर्माण क्षेत्र में अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ग्रोथ ताकत बन चुका है। यदि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निर्माण और परियोजना अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
