Movie prime

MQ-9B Sea Guardian Deal: 1,943 करोड़ खर्च कर भारत ने क्यों किराए पर लिए अमेरिकी ड्रोन? समझिए पूरी कहानी

भारत ने भारतीय नौसेना के लिए अमेरिका की General Atomics से दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन 30 महीने के लिए 1,943 करोड़ रुपये में लीज पर लिए हैं। इनका इस्तेमाल हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी की निगरानी, खुफिया जानकारी और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

 
MQ-9B Sea Guardian Deal
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

MQ-9B Sea Guardian Deal: भारतीय नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी General Atomics Aeronautical Systems के साथ 1,943 करोड़ रुपये का समझौता किया है। इसके तहत नौसेना को दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर मिलेंगे। इन ड्रोन के जरिए समुद्री क्षेत्र में लंबी दूरी की खुफिया, निगरानी और टोही क्षमता बढ़ाई जाएगी।

30 महीने के लिए लीज पर लिए गए ड्रोन

रक्षा मंत्रालय ने 17 अगस्त को जनरल एटॉमिक्स के साथ यह अनुबंध किया। MQ-9B Sea Guardian को हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। यह करीब 30 घंटे तक लगातार उड़ान भरकर बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी करने में सक्षम है।

नौसेना इन ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड रिकॉनिसेंस (ISR) मिशन और समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए करेगी। इससे हिंद महासागर में दूर-दराज के इलाकों पर लगातार नजर रखने की क्षमता बढ़ेगी।

सवाल- आखिर लीज पर क्यों लिए गए ड्रोन?

भारत ने पहले ही MQ-9B ड्रोन खरीदने का फैसला कर रखा है। अक्टूबर 2024 में भारत ने कुल 31 MQ-9B ड्रोन हासिल करने का समझौता किया था। इनमें 15 Sea Guardian नौसेना के लिए और 16 Sky Guardian सेना व वायुसेना के लिए हैं। हालांकि, इनकी पहली डिलीवरी 2029 की शुरुआत से होने की उम्मीद है।

ऐसे में खरीद के तहत ड्रोन मिलने तक निगरानी क्षमता में कोई अंतर न आए, इसलिए लीज का रास्ता अपनाया गया है। रक्षा उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया में मंजूरी, मूल्यांकन और बातचीत समेत कई चरण होते हैं, जबकि लीज के जरिए तत्काल जरूरत पूरी की जा सकती है।

2020 से नौसेना कर रही Sea Guardian का इस्तेमाल

भारतीय नौसेना के लिए MQ-9B Sea Guardian का इस्तेमाल नया नहीं है। नौसेना नवंबर 2020 से जनरल एटॉमिक्स के दो ड्रोन लीज पर संचालित कर रही है। इन्हें उस समय शामिल किया गया था, जब गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था।

नए दो ड्रोन मिलने से नौसेना की मौजूदा निगरानी क्षमता को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी और 2029 से शुरू होने वाली स्थायी खरीद की डिलीवरी तक एक महत्वपूर्ण अंतर भी नहीं आएगा।

हिंद महासागर में क्यों अहम हैं ये ड्रोन?

भारत के लिए हिंद महासागर रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग आते हैं। ऐसे में लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी करने वाले ड्रोन नौसेना को समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखने में मदद करते हैं।

MQ-9B जैसे ड्रोन बड़े समुद्री क्षेत्र में निगरानी करते हुए नौसेना की Maritime Domain Awareness को मजबूत कर सकते हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों के बीच यह क्षमता भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।