क्या हमसे दूर होता जा रहा है हमारा चांद? जानिए हर साल पृथ्वी से कितनी बढ़ रही है इसकी दूरी
नई दिल्ली। रात के आसमान में हर दिन दिखाई देने वाला हमारा चांद धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर होता जा रहा है। यह सुनने में भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे वर्षों पहले साबित कर दिया है। शोध के अनुसार चंद्रमा हर साल पृथ्वी से औसतन 3.83 सेंटीमीटर दूर खिसक रहा है। यह दूरी लगभग उतनी ही है, जितनी तेजी से इंसान के नाखून बढ़ते हैं। हालांकि इंसानी जीवनकाल में इसका कोई बड़ा असर दिखाई नहीं देता, लेकिन करोड़ों वर्षों बाद इसका प्रभाव पृथ्वी के दिन, समुद्र और सूर्य ग्रहण जैसे प्राकृतिक घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।
कैसे पता चला कि चांद दूर जा रहा है?
1969 से 1971 के बीच अपोलो मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह पर विशेष लेजर रिफ्लेक्टर (शीशे) लगाए थे। वैज्ञानिक आज भी पृथ्वी से इन पर लेजर किरणें भेजते हैं और उनके लौटने में लगने वाले समय को मापते हैं। इसी अत्यंत सटीक तकनीक से यह पता चला कि चंद्रमा हर वर्ष लगभग 3.83 सेंटीमीटर पृथ्वी से दूर जा रहा है।
आखिर चांद दूर क्यों जा रहा है?
इसका सबसे बड़ा कारण ज्वार-भाटा (Tides) और पृथ्वी का घूर्णन है। चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण समुद्र के पानी को अपनी ओर खींचता है, जिससे ज्वार उत्पन्न होता है। दूसरी ओर पृथ्वी अपनी धुरी पर तेज गति से घूमती है, जिसके कारण समुद्र का उभरा हुआ हिस्सा चंद्रमा की स्थिति से थोड़ा आगे निकल जाता है।
यह अतिरिक्त जलराशि अपने गुरुत्वाकर्षण से चंद्रमा को हल्का-सा आगे खींचती है। इससे चंद्रमा को थोड़ी ऊर्जा मिलती है और उसकी कक्षा धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है। परिणामस्वरूप वह हर साल पृथ्वी से कुछ सेंटीमीटर दूर चला जाता है।
पृथ्वी पर क्या पड़ सकता है असर?
1. दिन होते जाएंगे लंबे
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की घूर्णन गति धीरे-धीरे कम हो रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग एक अरब वर्ष पहले पृथ्वी पर एक दिन केवल 19 घंटे का होता था, जबकि आज 24 घंटे का है। भविष्य में पृथ्वी और धीमी गति से घूमेगी, जिससे दिन की अवधि और बढ़ सकती है।
2. पूर्ण सूर्य ग्रहण बन जाएगा इतिहास
आज पृथ्वी से देखने पर सूर्य और चंद्रमा लगभग एक ही आकार के दिखाई देते हैं। इसी वजह से पूर्ण सूर्य ग्रहण संभव होता है। लेकिन जैसे-जैसे चंद्रमा दूर जाएगा, वह आसमान में छोटा दिखाई देगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 60 करोड़ (600 मिलियन) वर्ष बाद चंद्रमा इतना छोटा दिखाई देगा कि वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा। यानी भविष्य में पूर्ण सूर्य ग्रहण हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।
3. कमजोर पड़ जाएगा ज्वार-भाटा
चंद्रमा की दूरी बढ़ने से उसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव भी धीरे-धीरे कम होगा। इससे समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटे पहले की तुलना में कमजोर हो जाएंगे। इसका असर तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, समुद्री जीव-जंतुओं और कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
क्या घबराने की जरूरत है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं है। चंद्रमा का पृथ्वी से दूर जाना कोई नई घटना नहीं है। यह प्रक्रिया लगभग 4.5 अरब वर्षों से लगातार जारी है और बेहद धीमी गति से होती है। इंसानी जीवनकाल में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव महसूस नहीं होगा। हालांकि करोड़ों वर्षों बाद पृथ्वी की प्राकृतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
