एक खुराक में कालाजार का इलाज! WHO से मान्यता, BHU के प्रो श्याम सुंदर अग्रवाल को मिला पद्मश्री
Jan 25, 2026, 22:43 IST
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वाराणसी। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म सम्मानों की घोषणा के तहत इस बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से जुड़े दो प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें से एक नाम चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल का भी है, जिन्होंने कालाजार जैसी घातक बीमारी के इलाज और नियंत्रण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आइए जानते है इनकी कहानी और उनके बारे में विस्तार से...
कौन है प्रो. श्याम सुंदर
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल को कालाजार के निदान और उपचार में ऐतिहासिक योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की एकल खुराक से कालाजार के प्रभावी इलाज की विधि विकसित की, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी मान्यता दी।
उनकी विकसित की गई यह एकल खुराक आज भारत के राष्ट्रीय कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, उन्होंने कालाजार के इलाज में मल्टी ड्रग थेरेपी का पहला सफल परीक्षण किया, जिसे भी WHO ने स्वीकृति दी।
दवाओं और जांच तकनीकों में भी अहम योगदान
प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल ने मिल्टेफोसीन जैसी प्रभावी दवा के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका उपयोग भारत, नेपाल और बांग्लादेश सहित कई देशों में किया गया। साथ ही, पेरेमोमाइसीन और मिल्टेफोसीन के संयोजन को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में उनका योगदान रहा।
कालाजार की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली RK-39 स्ट्रिप जांच का पहला परीक्षण भी उन्होंने ही किया था। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें पहले राष्ट्रपति द्वारा ‘विजिटर अवॉर्ड’ और ‘डॉ. पीएन राजू ओरेशन’ सम्मान भी मिल चुका है।
कौन है प्रो. श्याम सुंदर
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल को कालाजार के निदान और उपचार में ऐतिहासिक योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की एकल खुराक से कालाजार के प्रभावी इलाज की विधि विकसित की, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी मान्यता दी।
उनकी विकसित की गई यह एकल खुराक आज भारत के राष्ट्रीय कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, उन्होंने कालाजार के इलाज में मल्टी ड्रग थेरेपी का पहला सफल परीक्षण किया, जिसे भी WHO ने स्वीकृति दी।
दवाओं और जांच तकनीकों में भी अहम योगदान
प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल ने मिल्टेफोसीन जैसी प्रभावी दवा के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका उपयोग भारत, नेपाल और बांग्लादेश सहित कई देशों में किया गया। साथ ही, पेरेमोमाइसीन और मिल्टेफोसीन के संयोजन को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में उनका योगदान रहा।
कालाजार की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली RK-39 स्ट्रिप जांच का पहला परीक्षण भी उन्होंने ही किया था। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें पहले राष्ट्रपति द्वारा ‘विजिटर अवॉर्ड’ और ‘डॉ. पीएन राजू ओरेशन’ सम्मान भी मिल चुका है।
