प्रधानमंत्री से सीखिए चुनौती को अवसर में बदलना, वैश्विक दबावों के बीच PM मोदी की नीति की अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा
वैश्विक टैरिफ और व्यापार दबावों के बीच पीएम मोदी की आर्थिक रणनीति की ‘द इकोनामिस्ट’ ने सराहना की है। रिपोर्ट में भारत की मजबूत जीडीपी वृद्धि और सुधारों को यूरोप के लिए सीख बताया गया।
PM Modi economic strategy: वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ और निवेशकों की सतर्कता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रिका ‘द इकोनामिस्ट’ की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी ने कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए भारत की विकास यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने किसी भी दबाव में आकर जल्दबाज़ी में समझौते नहीं किए। प्रधानमंत्री मोदी की यह व्यावहारिक नीति भारत के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देने का संकेत देती है।
यूरोपीय नेताओं के लिए एक सीख
द इकोनामिस्ट ने यह भी उल्लेख किया कि भारत का अनुभव उन यूरोपीय नेताओं के लिए एक सीख हो सकता है, जो वाशिंगटन के टैरिफ दबावों से जूझ रहे हैं। भारत ने संतुलित और चतुर कूटनीति के जरिए बाहरी दबावों को घरेलू सुधारों की गति बढ़ाने का माध्यम बनाया।
रिपोर्ट में बताया गया कि मोदी सरकार के नेतृत्व में चीन के साथ संबंधों में सुधार हुआ है, निवेश पर लगी कई पाबंदियां हटाई गई हैं और अहम व्यापार समझौते किए गए हैं। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर सरकार ने कर प्रणाली को सरल बनाया, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उदारीकरण किया, बिजली क्षेत्र को निजी और विदेशी निवेश के लिए खोला और श्रम कानूनों में व्यापक सुधार किए। रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में कृषि सुधारों को लेकर विरोध हुआ, लेकिन सरकार ने दीर्घकालिक सुधारों का रास्ता नहीं छोड़ा।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत
अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत तक टैरिफ, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और रुपये पर दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही तक 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि और वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर अनुमान को 7.4 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
मोदी सरकार की सबसे बड़ी ताकत यह रही है कि उसने वैश्विक दबावों के सामने झुकने के बजाय रणनीतिक धैर्य अपनाया। टैरिफ युद्ध और भू-राजनीतिक तनावों के दौर में भारत ने सुधारों को रोका नहीं, बल्कि उन्हें और तेज किया। यही वजह है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारत निवेशकों के लिए भरोसेमंद अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
