Fortune 500 में अभी 9 भारतीय कंपनियां, PM मोदी का लक्ष्य 50! बताया पूरा प्लान- समझिए कितना बड़ा है ये टारगेट
Fortune 500 Indian Companies: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भारत की कंपनियों के लिए एक बड़ा वैश्विक लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि अगले एक दशक में Fortune 500 की सूची में 50 भारतीय कंपनियां होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भारतीय कारोबारियों से घरेलू बाजार तक सीमित रहने के बजाय दुनिया के बड़े बाजारों में अपनी पहचान बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि ऐसे वैश्विक स्तर के कारोबार खड़े करने हैं, जो दुनिया की प्रमुख कंपनियों के साथ मुकाबला कर सकें। उनके इस लक्ष्य को विकसित भारत 2047 की आर्थिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अभी कितनी भारतीय कंपनियां Fortune Global 500 में?
Fortune Global 500 दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की वार्षिक सूची है, जिसमें कंपनियों को उनके राजस्व के आधार पर स्थान दिया जाता है।
2025 की Fortune Global 500 सूची में 9 भारतीय कंपनियां शामिल थीं। इनमें Reliance Industries, LIC, Indian Oil Corporation, SBI, ONGC, HDFC Bank, Tata Motors, BPCL और ICICI Bank जैसी कंपनियां शामिल थीं। ऐसे में 50 कंपनियों का लक्ष्य मौजूदा संख्या के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा विस्तार की मांग करता है।
पीएम मोदी का संदेश साफ है कि भारतीय कंपनियों को केवल देश में बड़े कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर अपना आकार, बाजार और प्रभाव बढ़ाना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग में पूरी वैल्यू चेन बनाने पर जोर
पीएम मोदी ने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल अंतिम उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे कंपोनेंट और पार्ट्स से लेकर जटिल तैयार उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन देश में विकसित करनी होगी।
उन्होंने डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाने की बात कही। इसके लिए भारतीय कंपनियों को तीन अहम मानकों—लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन (Scale) पर दुनिया की कंपनियों के साथ मुकाबला करना होगा।
भारत सिर्फ अपने बाजार के लिए नहीं, दुनिया के लिए बनाए
प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से घरेलू मांग से आगे बढ़कर वैश्विक बाजारों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे उत्पाद तैयार करने होंगे, जिनकी दुनिया के अलग-अलग देशों में मांग हो।
भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापार भागीदारी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश ने 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं और दुनिया भारत की क्षमताओं को पहचान रही है।
‘Make in India’ से ग्लोबल कंपनियों तक का लक्ष्य
Fortune 500 का लक्ष्य केवल कंपनियों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा नहीं है। इसके पीछे भारतीय कंपनियों को वैश्विक ब्रांड और ग्लोबल बिजनेस बनाने की सोच है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आने वाले 5 से 7 वर्षों में वह हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए, जो पिछले 5 से 7 दशकों में नहीं हो सका। इसके लिए युवाओं की क्षमता, तकनीक, नवाचार और उद्योगों की ताकत को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ी ताकत
पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आए बदलावों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस अवधि में डिफेंस प्रोडक्शन करीब चार गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करीब सात गुना और मोबाइल फोन उत्पादन करीब 33 गुना बढ़ा है।
सरकार का लक्ष्य अब इन क्षेत्रों की क्षमता को और बढ़ाकर भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद और मजबूत भागीदार बनाना है।
‘शक्ति की सप्तधारा’ में मैन्युफैक्चरिंग अहम हिस्सा
पीएम मोदी ने भारत के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन भी सामने रखा। इसमें सात प्रमुख क्षेत्रों को विकास की ताकत के रूप में रेखांकित किया गया है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं।
इन क्षेत्रों के जरिए भारत को आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से मजबूत बनाकर 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर ले जाने की योजना पर जोर दिया गया।
भारतीय कंपनियों को बड़ा सोचने का संदेश
पीएम मोदी के भाषण का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि भारतीय कंपनियों को सिर्फ घरेलू बाजार में नंबर-1 बनने की महत्वाकांक्षा से आगे बढ़ना होगा। Fortune 500 में 50 भारतीय कंपनियों का लक्ष्य पूरा करने के लिए कंपनियों को बड़े निवेश, बेहतर उत्पादकता, वैश्विक विस्तार, तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा पर लगातार काम करना होगा।यानी लाल किले से दिया गया यह लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के कॉरपोरेट सेक्टर को ग्लोबल स्केल पर ले जाने की चुनौती भी है।
