Movie prime

CJP प्रोटेस्ट के बाद उठे सवाल : क्या बिना नेमप्लेट और सादे कपड़ों में कार्रवाई कर सकती है पुलिस? जानिए क्या कहता है कानून

 
...
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली। दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में कुछ लोग सादे कपड़ों में हाथों में लाठियां लिए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करते दिखाई दिए। दावा किया गया कि ये पुलिसकर्मी थे। इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या पुलिस बिना वर्दी या नेमप्लेट के भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई कर सकती है और क्या ऐसा करना कानून के दायरे में आता है।

प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?

20 जुलाई को CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया था। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने लगे। उन्हें रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग सादे कपड़ों में लाठियां लिए नजर आए। साथ ही कुछ पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नेमप्लेट नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन दावों के बाद CJP और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग की।

दिल्ली पुलिस ने क्या कदम उठाया?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने संबंधित इकाइयों को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर ही ड्यूटी करें और सादे कपड़ों में ड्यूटी से बचें। हालांकि, वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान या उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन जारी नहीं किया गया है।

कानून क्या कहता है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 148 से 160 में भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। लेकिन इन धाराओं में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई के दौरान हर पुलिसकर्मी के लिए वर्दी पहनना या अपनी पहचान सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इंटेलिजेंस विंग, स्पेशल ब्रांच और कुछ अन्य विशेष इकाइयों के अधिकारी अक्सर सादे कपड़ों में काम करते हैं। उनका मुख्य कार्य भीड़ के बीच रहकर सूचना जुटाना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जानकारी एकत्र करना होता है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कई बार आपात या संवेदनशील परिस्थितियों में सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी निभानी पड़ सकती है।

पहचान छिपाने की जरूरत क्यों पड़ती है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई संवेदनशील मामलों में यदि किसी अधिकारी की पहचान सार्वजनिक हो जाए तो उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उत्पीड़न, व्यक्तिगत हमलों और कानूनी विवादों जैसी आशंकाओं को देखते हुए कुछ परिस्थितियों में पहचान गोपनीय रखना जरूरी माना जाता है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि किसी विशेष घटना में सादे कपड़ों में दिख रहे व्यक्ति वास्तव में पुलिसकर्मी थे या नहीं, अथवा उन्होंने किस क्षमता में कार्रवाई की, इसका निष्कर्ष केवल वायरल वीडियो के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में आधिकारिक जांच या पुलिस के बयान को ही अंतिम माना जाएगा।