तार-तार होते रिश्ते जो: अब कॉन्ट्रैक्ट डील
रिश्ते कभी रेशम की डोर हुआ करते थे। एक गांठ ढीली पड़े तो दूसरा हाथ कस लेता था। आज वही डोर तार-तार हो रही है। पहले रिश्ते की परिभाषा 4 लाइन में लिख देते थे - " भरोसा, त्याग, इज्जत, साथ "। आज वही परिभाषा 280 कैरेक्टर के ट्वीट में भी नहीं समाती। पूना केतन अग्रवाल केस ने फायंसी और लवर के जरिए बता दिया कि रिश्ते बदल गए हैं। बदले नहीं, बिगड़ गए हैं।
पूना में केतन अग्रवाल का कत्ल इसी तार-तार रिश्ते की आखिरी गवाह है। फायंसी ने वादे किए, लवर ने प्लान बनाया, और बीच में एक सपना तार-तार हो गया। सवाल ये नहीं कि केतन को किसने मारा। सवाल ये है कि "रिश्ता" नाम की चीज को किसने तार-तार कर दिया?
आज के रिश्तो का इमोशनल हुक
"तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ" - ये आखिरी मैसेज था जो केतन ने पढ़ा। स्क्रीन बंद हुई और जिंदगी भी। फायंसी के इंतजार में वो निकला, और लवर की साजिश में फंस गया। 3 लोगों की कहानी थी। 2 का रिश्ता, 1 का खून। आज रिश्ते तार-तार हो रहे हैं। व्हाट्सऐप पर ब्लॉक, दिल में चाकू। केतन की लाश ने बता दिया - जब भरोसा तार-तार होता है, तो जिस्म भी तार-तार हो जाता है।
रिश्ते तार-तार हो रहे हैं...
- सगाई की अंगूठी → धोखे की जंजीर बन गई
- "मैं तुमसे प्यार करती हूँ" → "उसे रास्ते से हटा दो" बन गया
- केतन अग्रवाल की कहानी → तार-तार होते रिश्तों का पोस्टमार्टम।
समय के साथ-साथ बदलते रिश्तों की नई परिभाषा -
1. पहले: रिश्ता = सुरक्षा
"मेरा हाथ पकड़ लो, दुनिया से लड़ा दूंगा"
आज: रिश्ता = पजेशन
"तुम मेरे हो, किसी और को देख भी लिया तो..."
केतन की फायंसी ने रिश्ते को सुरक्षा नहीं, कब्जे की डीड समझ लिया। नतीजा लाश।
2. पहले: ब्रेकअप = दुख + समय + मूव ऑन
रो लो, गाना सुन लो, दोस्त संभाल लेंगे।
आज: ब्रेकअप = बदला + साजिश + कत्ल
"ना" सुनने की आदत ही खत्म हो गई। इगो को चोट लगी तो चाकू चल गया। केतन की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने रिश्ता तोड़ा। सजा मौत मिली।
3. पहले: तीसरा = मेहमान, जिसे इज्जत से दरवाजा दिखा दो
आज: तीसरा = प्लानिंग पार्टनर
मोबाइल ने रिश्तों में तीसरे को एंट्री इतनी आसान कर दी कि फायंसी और लवर ने मिलकर केतन को "प्रॉब्लम" बना दिया। व्हाट्सऐप ग्रुप बनते हैं, रिश्ते तोड़ने के लिए।
4. पहले: वादा = 7 फेरे, 7 जन्म तक
आज: वादा = "जब तक मूड है"
फायंसी का वादा था केतन से। लवर से चैट थी। दोनों वादे एक साथ नहीं निभते। पर आज के रिश्ते "ऑप्शन" पर चलते हैं। प्लान A फेल तो प्लान B रेडी। इंसान बीच में पिस जाता है।
5. पहले: रिश्ता निभाने के लिए झुका जाता था
आज: रिश्ता तोड़ने के लिए गर्दन झुका दी जाती है
पहले लोग रिश्ते बचाने के लिए माफी मांगते थे। आज रिश्ते खत्म करने के लिए जान ले लेते हैं। केतन का कत्ल इसी मानसिकता का सबूत है।
समाज को 3 सीख:
1. डिक्शनरी अपडेट करो: रिश्ता = रिस्पेक्ट। रिस्पेक्ट नहीं तो रिश्ता नहीं। प्यार, वादा, फायंसी - सब शब्द बेकार हैं अगर इज्जत नहीं।
2. बच्चों को "NO" की ट्रेनिंग दो: स्कूल में मैथ सिखाओ, पर घर में "हार पचाना" भी सिखाओ। जो "ना" नहीं झेल सकता, वो कल कातिल बन जाएगा।
3. प्राइवेसी = सुरक्षा: रिश्ते की हर बात स्टेटस पर डालोगे तो फायंसी भी पढ़ेगी, लवर भी। और प्लान भी बन जाएगा। कम दिखाओ, ज्यादा जियो।
अंतिम लाइन:
- रिश्ते बदल रहे हैं, पर उनकी आत्मा वही है - "दो लोग, एक भरोसा"। आत्मा निकाल दोगे तो लाश ही बचेगी। केतन की लाश ने यही चीखकर कहा है।
- अब परिभाषा हमें लिखनी है। खून से या स्याही से - फैसला हमारा।
अंत में साहिर लुधियानवी के एक प्रसिद्ध फिल्म की पंक्ति याद आती है-
"वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन। उसे इक खूबसूरत मोड दे कर छोड़ना अच्छा .........
