क्या आप जानते हैं सोनम वांगचुक की पत्नी कौन हैं? शिक्षा, बिजनेस और आंदोलन... हर मोर्चे पर बनाई अलग पहचान
Who is Gitanjali Angmo:पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन और उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाली गीतांजलि अब आंदोलन की सबसे अहम आवाज बनकर सामने आई हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यदि सोनम वांगचुक संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं उनकी ओर से मार्च का नेतृत्व करेंगी। इसी घोषणा के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई हैं।
अस्पताल पहुंचने के बाद संभाली आंदोलन की कमान
दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों और अदालत के निर्देशों के आधार पर अस्पताल ले जाने के बाद गीतांजलि आंगमो लगातार उनके आंदोलन का पक्ष रख रही हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि उनकी अनुमति के बिना वांगचुक को कोई चिकित्सकीय प्रक्रिया न दी जाए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संसद मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।
कौन हैं गीतांजलि जे. आंगमो?
गीतांजलि जे. आंगमो एक सामाजिक उद्यमी (Social Entrepreneur) और शिक्षाविद हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, नवाचार और टिकाऊ विकास का मॉडल तैयार करना है। संस्थान ग्रीन कैंपस, सोलर-हीटेड इमारतों और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर काम करता है।
कॉरपोरेट करियर छोड़ चुना सामाजिक बदलाव का रास्ता
शिक्षा और प्रबंधन की पढ़ाई पूरी करने के बाद गीतांजलि ने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया। बाद में उन्होंने उद्यमिता की राह चुनी और शिक्षा, प्रकाशन तथा सामाजिक विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए। वर्ष 2017 में उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ HIAL की स्थापना की, जो आज लद्दाख में वैकल्पिक शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचाना जाता है।
कैसे हुई सोनम वांगचुक से मुलाकात?
एक साक्षात्कार में गीतांजलि आंगमो ने बताया था कि उनकी मुलाकात सोनम वांगचुक से एक शिक्षा सम्मेलन के दौरान हुई थी। शिक्षा और समाज के लिए समान सोच ने दोनों को करीब लाया और बाद में दोनों ने विवाह किया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर साथ मिलकर काम किया।
अब आंदोलन का नया चेहरा बनीं गीतांजलि
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच गीतांजलि आंगमो अब आंदोलन का नेतृत्व करती नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोगों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा है। उनके सक्रिय होने के बाद आंदोलन को नया नेतृत्व और नई ऊर्जा मिलने की चर्चा तेज हो गई है।
