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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस...

 
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस...
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मासूम जिंदगियां देखें सपने हजार,
पर सबके सपने पूरे कहां होते हैं यार?
मजबूरी की जंजीरों में कैद बचपन, 
कहीं भी नहीं मिलता इनको अपनापन।

हाथों में कलम की जगह झूठे गलास,
कंधों पर बस्ते की जगह बोझ का वास।
कहीं भट्टी की तपिश कारखाने का शोर 
मासूम कदम चल दिए जाने किस ओर।

इनका मन करता है कहीं खेल आए,
कुछ पल तो सपनों में हम खो जाएं।
शिक्षा प्रेम अवसर पर इनका अधिकार, 
क्यों नहीं मिलता इनको एक जैसा प्यार 

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनायें,
बच्चों को बाल श्रम से आजाद करायें।
बाल मजदूर है भविष्य हमारे देश का, 
ध्यान रखें शिक्षा और परिवेश का। 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।