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हर सवाल का जवाब AI से पूछते हैं? यह खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

नई स्टडी में दावा किया गया है कि ChatGPT और Claude जैसे AI चैटबॉट्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसानों की सोचने-समझने और फेक न्यूज पहचानने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। शोध में पाया गया कि AI मददगार है, लेकिन उस पर अंधाधुंध भरोसा भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

 
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ChatGPT AI Dependency: ChatGPT, Claude और अन्य AI चैटबॉट्स का बढ़ता इस्तेमाल जहां लोगों के काम को आसान बना रहा है, वहीं एक नई रिसर्च ने इसके संभावित खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि AI चैटबॉट्स पर अत्यधिक निर्भरता इंसानों की खुद सोचने-समझने, निर्णय लेने और गलत जानकारी पहचानने की क्षमता को कमजोर कर सकती है।

अध्ययन के अनुसार, AI टूल्स लोगों को तेजी से जवाब तो दे रहे हैं, लेकिन वे स्वतंत्र रूप से सोचने और जानकारी का विश्लेषण करने की आदत को धीरे-धीरे कम कर रहे हैं।

67 लोगों पर एक महीने तक हुई स्टडी

शोधकर्ताओं ने 67 प्रतिभागियों पर चार सप्ताह तक अध्ययन किया। इस दौरान उनसे यह पहचानने को कहा गया कि न्यूज से जुड़ी तस्वीरें और हेडलाइन असली हैं या फर्जी।

प्रतिभागियों को कुछ मामलों में ChatGPT-4o और Google Search से जुड़े AI असिस्टेंट की मदद लेने की अनुमति दी गई, जबकि कुछ मामलों में बिना किसी AI सहायता के निर्णय लेने को कहा गया।

अध्ययन के अंत में सामने आया कि AI की मदद से कई बार लोग सही जवाब तक पहुंच गए, लेकिन धीरे-धीरे उनकी खुद गलत जानकारी पहचानने की क्षमता कमजोर होने लगी।

फेक न्यूज पहचानने की क्षमता पर पड़ा असर

रिसर्च में पाया गया कि ChatGPT और Claude जैसे AI टूल्स फर्जी खबरों और तस्वीरों की पहचान करने में शुरुआती मदद जरूर करते हैं, लेकिन जब लोग उन पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने लगते हैं तो वे खुद तथ्यों की जांच करना कम कर देते हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंटरनेट पर AI से बनी तस्वीरें, एडिटेड फोटो और भ्रामक हेडलाइन तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में यदि लोग हर चीज के लिए AI पर निर्भर हो जाएंगे तो उनके लिए सही और गलत जानकारी में फर्क करना मुश्किल हो सकता है।

सिर्फ जवाब दे रहा AI, सोचने की आदत नहीं बढ़ा रहा

अध्ययन में कहा गया है कि AI का मुख्य फोकस उपयोगकर्ता को सही उत्तर देना है, न कि उसकी विश्लेषण करने की क्षमता को मजबूत करना। शोधकर्ताओं का मानना है कि लगातार AI पर निर्भर रहने से लोग खुद सवाल पूछने, तथ्यों को परखने और तर्क के आधार पर निर्णय लेने की आदत खो सकते हैं। AI से बेहतर हुए नतीजे, लेकिन घटी स्वतंत्र सोच

स्टडी में कुछ दिलचस्प आंकड़े भी सामने आए-

  • AI की मदद लेने पर सही निर्णय लेने की संभावना लगभग 21% तक बढ़ी।
  • लेकिन AI के बिना फर्जी तस्वीरों को पहचानने की क्षमता 15.3% तक कम हो गई।
  • लंबे समय में लोगों की खुद गलत जानकारी पकड़ने की क्षमता कमजोर होती दिखाई दी।

शोधकर्ताओं ने क्या कहा?

एमआईटी में पीएचडी कर रहीं और इस अध्ययन की सह-लेखिका अंकु रानी ने कहा कि AI के साथ काम करते समय लोगों को अक्सर लगता है कि वे किसी विषय को बेहतर समझ रहे हैं, जबकि कई मामलों में वे केवल AI द्वारा दिए गए उत्तरों पर निर्भर हो रहे होते हैं।

उनका कहना है कि AI एक उपयोगी सहायक हो सकता है, लेकिन उसे अपनी सोच और निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।

विशेषज्ञों की चेतावनी

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि AI का संतुलित उपयोग जरूरी है। यदि लोग हर जानकारी की पुष्टि, हर निर्णय और हर विश्लेषण के लिए केवल AI पर निर्भर होने लगेंगे तो भविष्य में उनकी आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

शोध का निष्कर्ष साफ है- AI आपकी मदद कर सकता है, लेकिन आपकी जगह सोच नहीं सकता। इसलिए तकनीक का उपयोग करें, लेकिन अपनी समझ और विवेक को हमेशा सक्रिय रखें।