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काशी विद्यापीठ में हुई काव्य लेखन प्रतियोगिता, 'विकसित भारत की आधारशिला' पर छात्रों ने लिखीं प्रेरक कविताएं

 
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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग की ओर से दीक्षोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को 'विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत की आधारशिला' विषय पर काव्य लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मानविकी संकाय के स्मार्ट रूम में आयोजित इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
 

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प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, समकालीन भारत की उपलब्धियों और विकसित भारत के संकल्प जैसे विषयों पर अपनी सोच को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करना था। प्रतिभागियों ने अपनी मौलिक कविताओं में आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल क्रांति, मेक इन इंडिया, अंतरिक्ष क्षेत्र में उपलब्धियां और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा जैसे विषयों को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतियोगिता की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़ ने कहा कि कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की चेतना को जागृत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीक, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, अंतरिक्ष और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्हें विद्यार्थियों ने अपनी कविताओं में संवेदनशील और प्रेरणादायक ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता में प्रस्तुत रचनाओं का मूल्यांकन काव्य शैली, विषय की समझ, विचारों की मौलिकता और प्रस्तुति के आधार पर किया गया। निर्णायक मंडल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन कर लिया है। विजेताओं को आगामी मुख्य दीक्षोत्सव समारोह में प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में साहित्य, राष्ट्रभक्ति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतियोगिता ने युवा प्रतिभाओं को अपनी सोच और लेखन क्षमता प्रदर्शित करने का एक सार्थक मंच प्रदान किया।