7 मिनट तक बजती रहीं तालियां! आखिर कौन सी है नेपाली फिल्म Elephants in the Fog, जिसने कान्स में रच दिया इतिहास?
Nepali Film Elephants in the Fog : दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोह में शामिल कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में नेपाल ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। नेपाली निर्देशक अबिनाश बिक्रम शाह की फिल्म ‘Elephants in the Fog’ ने कान्स के प्रतिष्ठित Un Certain Regard सेक्शन में जूरी पुरस्कार जीतकर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह पहली नेपाली फीचर फिल्म है, जिसे कान्स फिल्म फेस्टिवल के इस प्रतिष्ठित सेक्शन में आधिकारिक चयन मिला। फिल्म के प्रीमियर के बाद दर्शकों ने करीब सात मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाईं, जिसने इसे महोत्सव की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया।
आखिर क्या है ‘Elephants in the Fog’ की कहानी?
फिल्म की कहानी नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले ट्रांसजेंडर किन्नर समुदाय की मुखिया पिराती के इर्द-गिर्द घूमती है। पिराती अपने समुदाय की जिम्मेदारियों को निभाने वाली एक मजबूत महिला है, लेकिन उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसकी बेटी अचानक लापता हो जाती है। बेटी के गायब होने के बाद उसकी पूरी दुनिया हिल जाती है और उसे अपने प्रेमी तथा अपने समुदाय के बीच कठिन चुनाव करना पड़ता है। फिल्म सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के उस वर्ग की आवाज बनकर सामने आती है, जिसे अक्सर मुख्यधारा से दूर रखा जाता है।
हाथियों और किन्नर समुदाय के संघर्ष को जोड़ती है फिल्म
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रतीकात्मक प्रस्तुति है। निर्देशक ने स्थानीय ट्रांसजेंडर किन्नर समुदाय के संघर्षों की तुलना जंगली हाथियों से की है। जैसे जंगल सिकुड़ने और मानव अतिक्रमण के कारण हाथी अपने प्राकृतिक आवास से विस्थापित हो रहे हैं, उसी तरह समाज के हाशिए पर खड़े समुदाय भी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फिल्म इस सामाजिक और मानवीय संघर्ष को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है।
अल्पसंख्यक और LGBTQ+ समुदाय की कहानी
फिल्म में एक ऐसे परिवार की कहानी दिखाई गई है, जो हाथियों के हमलों से प्रभावित इलाके में रहता है। इस परिवार के माध्यम से LGBTQ+ और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन, संघर्ष, रिश्तों और सामाजिक चुनौतियों को सामने लाया गया है। खास बात यह है कि फिल्म में इन समुदायों के वास्तविक सदस्यों को अभिनय का अवसर दिया गया, जिससे कहानी और अधिक प्रामाणिक बन गई।
पुरस्कार जीतने के बाद क्या बोले निर्देशक?
जूरी पुरस्कार मिलने के बाद निर्देशक अबिनाश बिक्रम शाह भावुक नजर आए। उन्होंने कहा- सिनेमा में अंधेरे में भी देखने की शक्ति होती है। हमारी कहानी का इस मंच तक पहुंचना और ऐसी पहचान मिलना इस बात का प्रमाण है कि जो लोग अब तक अदृश्य थे, वे अब दुनिया के सामने दिखाई दे रहे हैं। शाह ने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम और कलाकारों को दिया।
नेपाली झंडे के साथ मंच पर मनाया जश्न
जैसे ही फिल्म के नाम की घोषणा हुई, पूरी टीम खुशी से झूम उठी। मंच पर कलाकारों और फिल्म यूनिट ने नाच-गाना और जयकारों के साथ जीत का जश्न मनाया। अभिनेत्री पुष्पा लामा ने मंच पर ही निर्देशक अबिनाश बिक्रम शाह को नेपाली राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाकर सम्मानित किया। यह दृश्य कान्स फिल्म फेस्टिवल के सबसे भावुक पलों में शामिल रहा।
19 फिल्मों के बीच मिली बड़ी जीत
इस वर्ष Un Certain Regard सेक्शन के लिए दुनिया भर से कुल 19 फिल्मों का चयन किया गया था। इनमें छह फिल्में पहली बार निर्देशन कर रहे फिल्मकारों की थीं। मुख्य पुरस्कार ‘Everytime’ को मिला, जबकि नेपाली फिल्म ‘Elephants in the Fog’ ने जूरी पुरस्कार अपने नाम किया।
इसके अलावा Iron Boy को विशेष जूरी पुरस्कार मिला। Congo Boy को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला। Sempre So Tu Animal Materno की अभिनेत्री को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया।
नेपाल के सिनेमा के लिए ऐतिहासिक क्षण
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ‘Elephants in the Fog’ की सफलता सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं, बल्कि नेपाली सिनेमा के वैश्विक मंच पर मजबूत उपस्थिति का संकेत है। कान्स जैसे प्रतिष्ठित मंच पर मिली यह पहचान नेपाल की फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। यह फिल्म दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत कहानी और संवेदनशील प्रस्तुति दुनिया भर के दर्शकों को प्रभावित कर सकती है।
