कौन थी FBI की मोस्ट वॉन्टेड टेरेरिस्ट में शामिल Assata Shakur, जेल से फरार कैदी या ब्लैक रेवॉल्यूशन की रानी
Assata Shakur dies in Cuba: हवाना की धरती पर 25 सितंबर को एक कहानी थम गई, जिसने दशकों तक अमेरिका को हिला कर रखा। असाता शकूर (Assata Shakur) जिसका असली नाम जोन डेबोरा चेसिमार्ड था- 78 साल की उम्र में चल बसीं। क्यूबा के विदेश मंत्रालय ने उसकी मौत की पुष्टि की। कारण भले ही साफ़ न बताया गया हो, लेकिन बयान में संकेत मिला कि यह उम्र और स्वास्थ्य से जुड़े कारण से हुआ। असाता शकूर वो नाम है जो FBI के टॉप मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स के लिस्ट में आता है, जो एफबीआई की दुश्मन नंबर वन कही जाती थी। लेकिन एक महिला एक्टिविस्ट से टॉप मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट की लिस्ट में कैसे आ गई। चलिए जानते हैं।
‘ब्लैक रेवॉल्यूशन’ की रानी, FBI की दुश्मन नंबर वन
असाता शकूर को दुनिया ने एक ब्लैक रेवोल्यूशनरी के तौर पर जाना। वह FBI की “मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट” लिस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला थीं। इतना ही नहीं, वह मशहूर रैपर टुपैक शकूर की दादी भी थीं। उनके समर्थकों के लिए असाता, नस्लीय अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली योद्धा थीं, वहीं अमेरिकी एजेंसियों के लिए वह आतंक और अपराध का प्रतीक।
जेल से फरार और क्यूबा तक का सफर
1973 में एक स्टेट ट्रूपर की हत्या में शामिल होने के आरोप में असाता को आजीवन कारावास की सजा मिली। 1977 में उन्हें हत्या, लूट और हथियारबंद हमलों के मामलों में दोषी ठहराया गया। 1977 में लंबी सुनवाई के बाद असाता शकूर को हत्या और हमले के छह आरोपों में दोषी करार दिया गया। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन उनकी गिरफ्तारी और मुकदमे पर सवाल उठते रहे। समर्थकों का कहना था कि यह केस “न्याय से ज्यादा नस्लवाद” पर आधारित था।
असाता को जेल में अमानवीय हालात झेलने पड़े। उन्हें पुरुष कैदियों वाली जेल में रखा गया, महीनों तक सिंगल सेल में कैद किया गया, और 24 घंटे निगरानी होती रही। उन्होंने अपनी आत्मकथा “Assata: An Autobiography” में लिखा- “जेल की बदबू अलग होती है- खून, पसीना, घाव और निराशा की मिली-जुली गंध। यह किसी भी नर्क से कम नहीं।”
नवंबर 1979 में ब्लैक लिबरेशन आर्मी (BLA) के सहयोग से वह जेल से भाग निकलीं। FBI के मुताबिक, BLA के सदस्यों ने न्यू जर्सी के क्लिंटन करेक्शनल फैसिलिटी पर धावा बोला, गार्ड्स को बंधक बनाया और असाता को छुड़ा ले गए।
क्यूबा में मिला आश्रय
अमेरिकी एजेंसियों ने उनके पीछे 20 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया, 1984 में असाता शकूर क्यूबा में सार्वजनिक तौर पर सामने आईं। फिदेल कास्त्रो ने उन्हें शरण दी और वहीं उन्होंने बाकी जिंदगी गुजारी। उन्होंने अपनी लेखनी में हमेशा कहा कि उनकी हथेलियां ऊपर थीं और उन्होंने किसी पर गोली नहीं चलाई। उनका कहना था— “मैं कातिल नहीं, मैं लड़ाकू हूँ। मेरी जंग न्याय के लिए थी, नफ़रत के लिए नहीं।”
‘जोएन’ से ‘असाता’ बनने तक
असाता शकूर का जन्म 1947 में न्यूयॉर्क में हुआ था। उनका असली नाम था जोएन डेबोरा बायरन। बचपन से ही उन्होंने नस्लभेद के जहर को महसूस किया। उनके दादा-दादी ने उन्हें हमेशा सिखाया- सिर ऊँचा रखो, आंखें नीचे मत करना। किसी को मत झुकना। यही गर्व और आत्मसम्मान उनकी सोच का हिस्सा बन गया। धीरे-धीरे वियतनाम युद्ध, सिविल राइट्स मूवमेंट और ब्लैक एक्टिविज़्म से उनका जुड़ाव हुआ। वह कहती थीं- “मेरा दिल और आत्मा अफ्रीका में जा चुके थे, लेकिन नाम अब भी यूरोप में अटका था।”
इसके बाद वे ब्लैक पैंथर पार्टी और फिर ब्लैक लिबरेशन आर्मी से जुड़ गईं। उन पर कई गंभीर आरोप लगे— बैंक डकैती, हथियारबंद हमले और पुलिस पर गोलीबारी। कई मामलों में वे बरी हुईं, कुछ में ट्रायल अधूरा रहा, लेकिन इन सबने उन्हें अमेरिका में “खतरे का नाम” बना दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने कार्यकाल में क्यूबा से असाता की वापसी की मांग की थी। लेकिन वह हवाना में ही रही, जहां उनके नाम का इस्तेमाल एक प्रतीक के रूप में होता रहा। अफ्रिकन्स के लिए एक हीरो तो अमेरिका के लिए दुश्मन नंबर वन का सफर 25 सितंबर 2026 की देर रात क्यूब में खत्म (Assata Shakur dies) हुआ।
FAQs -
- असाता शकूर को अमेरिका में कब गिरफ्तार किया गया था?
असाता शकूर को 1977 में अमेरिका में हत्या और सशस्त्र डकैती का दोषी पाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था।
- असाता शकूर ने किसकी हत्या की?
एफबीआई के अनुसार, अस्साता शकूर ने एक अमेरिकी पुलिस अधिकारी वर्नर फ़ॉस्टर को गोली मारी थी।
- असाता शकूर अमेरिका से कब भागी?
वह 1979 में अमेरिका छोड़कर क्यूबा चली गई थी।
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