Claude Mythos से हिल सकती है दुनिया की बैंकिंग सिस्टम! IMF की रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन, किया अलर्ट
Anthropic के नए AI मॉडल Claude Mythos को लेकर IMF ने गंभीर चेतावनी जारी की है। IMF के मुताबिक यह AI मॉडल साइबर हमलों को मशीन स्पीड पर अंजाम देने में सक्षम हो सकता है, जिससे वैश्विक बैंकिंग, पेमेंट और वित्तीय सिस्टम पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
Claude Mythos IMF Warning: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इसके खतरों को लेकर चिंता भी गहराती जा रही है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने Anthropic के नए AI मॉडल “Claude Mythos” को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। IMF का कहना है कि यह एडवांस AI मॉडल भविष्य में वैश्विक वित्तीय सिस्टम के लिए बड़ा साइबर खतरा बन सकता है।
दरअसल, 7 अप्रैल 2026 को AI स्टार्टअप Anthropic ने Claude Mythos नाम के अपने सबसे उन्नत AI मॉडल की घोषणा की थी। कंपनी ने दावा किया था कि यह मॉडल खासतौर पर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली है। हालांकि, कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए जारी नहीं किया। Anthropic का कहना था कि यह AI इतना शक्तिशाली है कि गलत हाथों में पड़ने पर इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क में भारी तबाही मचा सकता है।
IMF ने क्यों जताई चिंता?
IMF ने अपनी ताजा ब्लॉग रिपोर्ट में कहा है कि Claude Mythos जैसे AI मॉडल साइबर हमलों को पहले से कहीं ज्यादा तेज और खतरनाक बना सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह AI सिस्टम्स में कमजोरियों को बेहद कम समय और कम लागत में पहचान सकता है।
यानी अगर किसी बैंक, पेमेंट नेटवर्क या फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म में कोई तकनीकी खामी मौजूद है, तो यह AI उसे तेजी से खोज सकता है। इसके बाद साइबर अपराधी उसी कमजोरी का इस्तेमाल करके एक साथ कई संस्थानों को निशाना बना सकते हैं।
IMF ने चेतावनी दी कि इस तरह के “correlated failures” पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर बैंकिंग सेवाओं, ऑनलाइन पेमेंट, खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन सिस्टम तक पर पड़ सकता है।
Machine Speed पर हो सकते हैं साइबर हमले
रिपोर्ट में कहा गया है कि Claude Mythos जैसे AI मॉडल मौजूदा साइबर हमले की तकनीकों को “machine speed” पर संचालित कर सकते हैं। इसका मतलब है कि हमलावर इंसानी गति से नहीं, बल्कि AI की अत्यधिक तेज क्षमता के साथ साइबर अटैक कर पाएंगे।
IMF का मानना है कि भविष्य में हैकर्स को एक बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि कमजोरियों का फायदा उठाने की गति सुरक्षा अपडेट और सिस्टम पैचिंग से कहीं ज्यादा तेज हो सकती है। ऐसे में साइबर सुरक्षा एजेंसियों और संस्थानों के लिए समय रहते बचाव करना मुश्किल हो सकता है।
सिर्फ बैंकिंग ही नहीं, कई सेक्टर खतरे में
IMF ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि अगर अधिक उन्नत AI मॉडल सुरक्षा प्रणालियों को तोड़ने में सक्षम हो गए, तो इसका असर केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा।
ऊर्जा, दूरसंचार, सार्वजनिक सेवाएं और सरकारी डिजिटल सिस्टम जैसे क्षेत्र भी बड़े खतरे में आ सकते हैं। क्योंकि कई संस्थान समान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए एक कमजोरी पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।
दुनिया से सहयोग की अपील
IMF ने इस संभावित खतरे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है। संस्था का कहना है कि सभी देशों को मिलकर मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार करना होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि AI के खतरों से लड़ने के लिए AI आधारित सुरक्षा सिस्टम विकसित किए जाएं और देशों के बीच तकनीकी जानकारी तथा सुरक्षा समाधान साझा किए जाएं। IMF ने खासतौर पर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक संवेदनशील बताया, क्योंकि उनके पास साइबर सुरक्षा संसाधन अपेक्षाकृत कम होते हैं।
अभी सिर्फ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित है Claude Mythos
फिलहाल Claude Mythos को आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है। यह AI मॉडल केवल करीब 40 चुनिंदा कंपनियों को “Project Glasswing” के तहत उपलब्ध कराया गया है।
इन कंपनियों में Amazon, Google और Apple जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं। सीमित पहुंच के कारण इन कंपनियों को अतिरिक्त सुरक्षा अपडेट और पैच उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
हालांकि, कई गैर-अमेरिकी बैंक और वित्तीय संस्थान अब तक इस AI मॉडल की पहुंच से बाहर हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर असमान साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत समेत कई देशों की नजर Claude Mythos पर
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत, यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे कई देश Claude Mythos तक पहुंच हासिल करना चाहते हैं ताकि अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिकी सरकार फिलहाल इस AI मॉडल तक पूर्ण पहुंच देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे संकेत हैं कि विदेशी सरकारों को सीमित एक्सेस दिया जा सकता है।
AI की दुनिया में Claude Mythos को लेकर उठ रही यह बहस अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और डिजिटल भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।
