ट्विटर वाले पराग अग्रवाल याद हैं? उनकी नई कंपनी की कीमत अब 19,020 करोड़ रुपये है
ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल ने अपने एआई स्टार्टअप Parallel Web Systems के जरिए शानदार वापसी की है। कंपनी ने 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाकर 2 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल की है। यह स्टार्टअप एआई एजेंट्स के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।
Parallel Web Systems: ट्विटर (अब एक्स) के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल ने एक बार फिर टेक दुनिया में अपनी मौजूदगी का दमदार अहसास कराया है। कंपनी से अचानक हटाए जाने के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन अब उन्होंने अपने नए एआई स्टार्टअप के जरिए ऐसी वापसी की है, जिसने निवेशकों और टेक इंडस्ट्री दोनों का ध्यान खींच लिया है।
उनकी कंपनी Parallel Web Systems ने हाल ही में 100 मिलियन डॉलर की बड़ी फंडिंग हासिल की है, जिससे इसका वैल्यूएशन करीब 2 अरब डॉलर यानी लगभग 19,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि किसी भी नए स्टार्टअप के लिए बेहद बड़ी मानी जाती है।
निवेशकों का भरोसा, तेजी से बढ़ती ताकत
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Sequoia Capital ने किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी वेंचर कैपिटल कंपनियों में गिनी जाती है। इससे पहले भी Kleiner Perkins, Index Ventures, Khosla Ventures और First Round Capital जैसे दिग्गज निवेशक इस स्टार्टअप पर भरोसा जता चुके हैं।
अब तक कंपनी कुल 230 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। इस नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी अपने रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट विस्तार में करेगी, जिससे इसकी ग्रोथ और तेज होने की उम्मीद है।
क्या है यह एआई टेक्नोलॉजी, जो बना रही है खास
Parallel Web Systems का फोकस एआई एजेंट्स के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। ये ऐसे स्मार्ट सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं जो इंसानों की जगह खुद काम कर सकते हैं—चाहे वह कानूनी रिसर्च हो, फाइनेंशियल एनालिसिस हो या बड़े डेटा का विश्लेषण।
कंपनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एआई को केवल पहले से ट्रेन किए गए डेटा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे लाइव इंटरनेट से जानकारी खोजने, उसे समझने और उसी के आधार पर काम पूरा करने की क्षमता देती है। यही वजह है कि इसे टेक्नोलॉजी की अगली बड़ी छलांग माना जा रहा है।
एआई एजेंट्स बदल रहे काम करने का तरीका
इस प्लेटफॉर्म की मदद से एआई एजेंट्स अब ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें पहले करने में इंसानों को घंटों या दिनों का समय लगता था। निवेश से जुड़ी रिसर्च, बीमा क्लेम प्रोसेसिंग, कानूनी दस्तावेजों का विश्लेषण और यहां तक कि सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े जटिल काम भी अब तेजी और सटीकता से पूरे किए जा रहे हैं।
इस तकनीक का मकसद काम को आसान बनाना ही नहीं, बल्कि उसे बड़े स्तर पर स्केलेबल और ज्यादा प्रभावी बनाना भी है।
बड़ी कंपनियों का बढ़ता भरोसा
Parallel Web Systems का प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके साथ 1 लाख से ज्यादा डेवलपर्स जुड़े हुए हैं।
Notion, Clay और Opendoor जैसी कंपनियां पहले ही इसके टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके अलावा बैंक, हेज फंड और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भी इसे अपना रही हैं, जो इसके भविष्य की संभावनाओं को और मजबूत बनाता है।
भविष्य की टेक्नोलॉजी पर फोकस
कंपनी ऐसे एआई सिस्टम्स पर काम कर रही है, जो लंबे समय तक बिना इंसानी हस्तक्षेप के काम कर सकें। ये सिस्टम्स न केवल डेटा को समझते हैं, बल्कि उसे याद रखते हुए कई स्टेप्स में जटिल काम भी पूरा कर सकते हैं।
इसी वजह से एंटरप्राइज सेक्टर में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में यह टेक्नोलॉजी बिजनेस ऑपरेशन का अहम हिस्सा बन सकती है।
ट्विटर से बाहर, लेकिन गेम में आगे
जैक डोर्सी के भरोसे पर ट्विटर की कमान संभालने वाले पराग अग्रवाल को एलन मस्क के अधिग्रहण के बाद अचानक पद से हटा दिया गया था। लेकिन अब उनकी यह नई शुरुआत यह दिखाती है कि टेक दुनिया में उनकी सोच और नेतृत्व क्षमता अभी भी बेहद मजबूत है। Parallel Web Systems के जरिए पराग अग्रवाल ने साफ संकेत दे दिया है कि वह सिर्फ वापसी ही नहीं कर रहे, बल्कि एआई की दुनिया में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में हैं।
